
वीबी-जी रामजी योजना से खेत में बनी डबरी, अब मछली पालन से परिवार की आय बढ़ाने की तैयारी
चंपारण्य में 73.42 करोड़ का श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स, केंद्र से मिली मंजूरी
रायपुर, 22 सितंबर 2026। अगर सरकारी योजना का सही इस्तेमाल हो और हितग्राही मेहनत करे, तो खेती के साथ कमाई के नए रास्ते भी खुल सकते हैं। धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के ग्राम पंचायत केकराखोली निवासी जगदेव पिता मंगलू राम के परिवार के लिए खेत में बनी आजीविका डबरी ऐसी ही उम्मीद लेकर आई है।
जगदेव लंबे समय से सीमित संसाधनों के बीच पारंपरिक खेती के सहारे परिवार चलाते रहे हैं। रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के बाद अतिरिक्त बचत करना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे में शासन की योजना के तहत उनके खेत में बनी डबरी अब परिवार की अतिरिक्त आय का जरिया बनने जा रही है।
योजना से खेत में बनी आजीविका डबरी
वित्तीय वर्ष 2026 में वीबी-जी रामजी योजना के तहत जगदेव के लिए आजीविका डबरी निर्माण की स्वीकृति मिली। डबरी बनने से उनके खेत में पानी जमा करने की स्थायी व्यवस्था तैयार हो गई।
जगदेव के लिए यह डबरी सिर्फ पानी बचाने का साधन नहीं है, बल्कि आने वाले समय में परिवार की आमदनी बढ़ाने का एक नया जरिया भी बन रही है।
पानी से भरी डबरी में शुरू होगा मछली पालन
फिलहाल डबरी पानी से पूरी तरह भरी हुई है। पानी की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए जगदेव ने इसमें मछली पालन शुरू करने का फैसला किया है।
उनका कहना है कि डबरी से उन्हें खेती के अलावा अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा। मछली पालन के काम में परिवार के सदस्य भी उनका सहयोग करेंगे।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए होगी बचत
मछली पालन से होने वाली संभावित आमदनी का उपयोग जगदेव परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की बेहतर शिक्षा, खेती को आधुनिक बनाने और भविष्य के लिए बचत करने में करना चाहता है।
इस तरह एक छोटी सी जल संरचना उनके परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का नया आधार बन रही है।
मेहनत से योजना का मिल रहा फायदा
जगदेव की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं से तैयार परिसंपत्तियों का सही उपयोग किया जाए तो ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के नए रास्ते खुल सकते हैं।
आज पानी से भरी उनकी आजीविका डबरी सिर्फ मिट्टी और पानी की संरचना नहीं है, बल्कि परिवार के आत्मनिर्भर और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गई है।



