
रजिस्ट्री के साथ हुआ नामांतरण, किसान को नहीं लगाने पड़े दफ्तर के चक्कर
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रायपुर, 24 सितंबर 2026। जमीन या मकान की रजिस्ट्री कराने के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करना और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता रहा है। अब ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से यह प्रक्रिया आसान हो रही है।
किसान चंद्रशेखर निषाद ने संपत्ति की रजिस्ट्री कराई तो इसके साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई। उनका नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। इसके लिए उन्हें अलग से कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।
उन्होंने बताया कि पहले रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी और इसमें समय लगता था। इस बार ऑटोम्यूटेशन की सुविधा से उनका नामांतरण जल्दी हो गया।
चंद्रशेखर निषाद ने कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरा काफी समय बचा और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।”
रजिस्ट्री के बाद अपने आप आगे बढ़ती है प्रक्रिया
ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था में संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इससे नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने और कार्यालयों में जाने की जरूरत कम हो रही है।
इस सुविधा से किसानों और आम लोगों को खास तौर पर राहत मिल रही है।
आधार से पहचान का सत्यापन
पंजीयन प्रक्रिया में आधार आधारित प्रमाणीकरण की सुविधा भी दी गई है। इससे खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापित करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाएं भी पंजीयन प्रक्रिया को आसान बना रही हैं। नागरिक नेट बैंकिंग और UPI के माध्यम से पंजीयन शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।
तकनीक से कम हो रही भागदौड़
किसान चंद्रशेखर निषाद का अनुभव बताता है कि तकनीक के इस्तेमाल से संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़ी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में आसान हो रही हैं।
रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ने से लोगों का समय बच रहा है और बार-बार सरकारी दफ्तर जाने की जरूरत कम हो रही है। सेवा संकल्प अभियान के तहत सामने आई यह कहानी तकनीक के जरिए नागरिक सेवाओं में हो रहे बदलाव की एक तस्वीर है।



