
सुकमा के जंगल में बाघ के होने के संकेत, ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील
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रायपुर, 24 सितंबर 2026। सुकमा वन क्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद इलाके में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर बाघ के संभावित पगमार्क मिले हैं।
वन विभाग ने इन संकेतों को देखते हुए इलाके में बाघ की गतिविधियों पर नजर बढ़ा दी है। डीएफओ अक्षय भोंसले के नेतृत्व में वन अमला उन क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है, जहां बाघ के आने-जाने की संभावना है।
इन इलाकों में विशेष निगरानी
कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के जंगलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं।
बाघ की मौजूदगी की पुष्टि और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों को मुनादी के जरिए सावधान किया जा रहा है। पुलिस और जिला प्रशासन की मदद से सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
शाम 4 बजे के बाद जंगल जाने से बचें
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचें। बहुत जरूरी होने पर समूह में ही जंगल जाने की सलाह दी गई है।
अगर कहीं बाघ दिखाई देता है तो उसके पास जाने, पीछा करने, भीड़ लगाने या उसे भगाने की कोशिश न करें। बाघ को खुद पकड़ने का प्रयास भी न करें।
अफवाहों से बचने की अपील
वन विभाग ने ग्रामीणों से बाघ से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को देने को कहा है। साथ ही अपुष्ट फोटो, वीडियो या खबरों को सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करने की अपील की गई है।
विभाग ने कहा है कि बाघ से संबंधित जानकारी के लिए वन विभाग और प्रशासन की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें।
मवेशी की मौत की पुष्टि होने पर मिलेगा मुआवजा
वन विभाग के अनुसार, यदि जांच में मवेशी की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि होती है, तो शासन के नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को मुआवजा दिया जाएगा।
विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और किसी भी जानकारी को तुरंत वन विभाग तक पहुंचाने की अपील की है।



