
81 साल की सोनकुंवर ने बेटे के नाम की जमीन, सिर्फ 500 रुपये में हुआ दानपत्र
दिव्यांगजनों को एक ही शिविर में मिली कई सुविधाएं, UDID से लेकर सहायक उपकरण तक की हुई व्यवस्था
रायपुर, 22 सितंबर 2026। उम्र बढ़ने के साथ सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना बुजुर्गों के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अगर किसी जरूरी काम की प्रक्रिया आसान हो जाए तो बड़ी राहत मिलती है। महासमुंद जिले के ग्राम बम्हनी की 81 वर्षीय सोनकुंवर के लिए भी जमीन अपने बेटे के नाम करना कुछ ऐसा ही अनुभव रहा।
सोनकुंवर ने अपने पुत्र रवि राम पाल के नाम जमीन का दानपत्र कराया। पारिवारिक दानपत्र के लिए पंजीयन शुल्क घटकर सिर्फ 500 रुपये होने से उनके परिवार को 6,600 रुपये से ज्यादा की सीधी बचत हुई।
उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के दौरान पंजीयन विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत में अपने अनुभव साझा किए।
कम शुल्क से मिली बड़ी राहत
सोनकुंवर ने बताया कि उम्रदराज लोगों के लिए जमीन और संपत्ति से जुड़े कामों के लिए बार-बार कार्यालय जाना परेशानी भरा हो सकता है। लेकिन बेटे के नाम जमीन का दानपत्र कराने की प्रक्रिया उन्हें पहले की तुलना में आसान लगी।
कम शुल्क होने से परिवार पर आर्थिक बोझ भी कम हुआ और अनावश्यक दौड़भाग से भी राहत मिली।
0.8 प्रतिशत की जगह अब सिर्फ 500 रुपये शुल्क
राज्य में पारिवारिक दानपत्र, हकत्याग पत्र और बंटवारे के पंजीयन शुल्क में बदलाव किया गया है। पहले इन दस्तावेजों पर संपत्ति के मूल्य के आधार पर 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था। अब इसे घटाकर 500 रुपये कर दिया गया है।
सोनकुंवर के मामले में भी इसी शुल्क व्यवस्था का लाभ मिला। इससे उनके परिवार को 6,600 रुपये से अधिक की बचत हुई।
ऑनलाइन सुविधाओं से भी आसान हो रहा काम
पंजीयन विभाग की ओर से जमीन और संपत्ति से जुड़े कामों को आसान बनाने के लिए डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है।
ऑनलाइन दस्तावेज तैयार करना, ऑनलाइन शुल्क भुगतान, आधार सत्यापन और डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को भी ऑटोमेशन से आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे नागरिकों को अलग से आवेदन करने और कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
सोनकुंवर ने जताई खुशी
सोनकुंवर और उनके बेटे रवि राम पाल ने जमीन के हस्तांतरण में मिली सुविधा और कम शुल्क के लिए शासन एवं पंजीयन विभाग के प्रति आभार जताया।
81 वर्षीय सोनकुंवर की कहानी बताती है कि कम शुल्क और सरल प्रक्रिया से संपत्ति से जुड़े जरूरी काम बुजुर्गों के लिए भी आसान बनाए जा सकते हैं। सेवा संकल्प अभियान में सामने आई यह कहानी इसी बदलाव का एक उदाहरण है।



