
छत्तीसगढ़ में UCC पर मंथन तेज, बस्तर से सरगुजा तक के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव
रायपुर, 1 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंगलवार को रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में UCC समिति के सामने बस्तर से लेकर सरगुजा तक के विभिन्न प्रतिनिधियों ने अपनी राय और सुझाव रखे।

परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और संपत्ति अधिकार जैसे विषयों पर अपने सुझाव दिए।
UCC समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त अधिकारी ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने प्रतिनिधियों की बात सुनी। समिति ने कहा कि प्रस्ताव तैयार करते समय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखा जाएगा।
आदिवासी रीति-रिवाजों के संरक्षण की मांग
परिचर्चा में कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी पारंपरिक प्रथाओं और रीति-रिवाजों से जुड़े मुद्दे रखे।
प्रतिनिधियों ने मांग की कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी परंपराओं और सांस्कृतिक विशिष्टता को प्रस्तावित कानून में उचित संरक्षण दिया जाए। इसके अलावा विवाह पंजीयन, संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।
महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर भी चर्चा
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी राय रखी। उन्होंने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सामाजिक बदलावों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता और धर्म परिवर्तन से जुड़े विषयों को भी UCC की चर्चा के संदर्भ में उठाया।
वहीं राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की लोककला और जनजातीय संस्कृति को संरक्षित रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास मिल सकता है।
अनुच्छेद 44 के तहत जुटाए जा रहे सुझाव
संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत UCC समिति प्रदेशभर में जन-संवाद कर रही है। प्रस्तावित संहिता में विवाह और तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर विचार किया जा रहा है।
समिति की ओर से जिला स्तर पर फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
समिति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितैषी UCC का प्रारूप तैयार करना है।



