
छत्तीसगढ़ में अब सिर्फ खनिज निकालने पर जोर नहीं, पूरी वैल्यू चेन विकसित होगी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर, 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज निकालने वाला राज्य नहीं रहेगा। सरकार की योजना खनिज की खोज से लेकर उसे निकालने, प्रोसेसिंग, उससे नए उत्पाद बनाने और रिसाइक्लिंग तक की पूरी व्यवस्था प्रदेश में विकसित करने की है। इससे राज्य में नए उद्योग आएंगे, निवेश बढ़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को नवा रायपुर के मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आयोजित क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी के रोड शो में यह बात कही।
छत्तीसगढ़ में 5 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉक्स की नीलामी
केंद्र सरकार द्वारा क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।
मुख्यमंत्री साय ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खदान हासिल करने का मौका नहीं है, बल्कि खनिज आधारित उद्योग लगाने और प्रदेश में नई आर्थिक गतिविधियां शुरू करने का अवसर भी है।
रक्षा से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक जरूरी हैं ये खनिज
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में क्रिटिकल मिनरल्स देश की अर्थव्यवस्था, तकनीक और सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होंगे। इनका इस्तेमाल रक्षा उपकरणों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में होता है।
लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण खनिजों की संभावनाएं हैं। कटघोरा और बस्तर में लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम और गैलियम, बालोद में फास्फोराइट और महासमुंद में निकेल व क्रोमियम जैसी खनिज संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इन संसाधनों का बेहतर उपयोग कर खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।
खनिज निकालकर बाहर भेजने के बजाय यहीं होगा मूल्य संवर्धन
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खनिज उत्पादन बढ़ाना नहीं है। खनिजों की प्रोसेसिंग और उनसे तैयार होने वाले उत्पादों का निर्माण भी छत्तीसगढ़ में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश को प्राकृतिक संसाधनों का ज्यादा आर्थिक लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इन उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत होगी।
निवेशकों के लिए सरकार ने आसान की प्रक्रियाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। नई औद्योगिक नीति के तहत विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के जरिए अनुमति और एनओसी की प्रक्रिया को आसान किया गया है। निवेशकों को पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क और बिजली शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
खनिज राजस्व 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ बनने के समय राज्य का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था। ढाई साल पहले यह करीब 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है।
खनिज से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल प्रदेश के विकास और लोगों की सुविधाओं के लिए किया जा रहा है। डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।
ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल की शुरुआत
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया।
ई-रेत संगवारी के माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को आसान और पारदर्शी बनाया जाएगा।
वहीं, दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी परिवारों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए टिन पोर्टल शुरू किया गया है।
सीएमडीसी ने दो संस्थाओं के साथ किया एमओयू
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच समझौता हुआ। इससे खनिज क्षेत्र से जुड़े कामों के लिए वित्तीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा सीएमडीसी और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच कोरन्डम कटिंग और पॉलिशिंग प्रशिक्षण को लेकर भी एमओयू हुआ। इससे युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और खनिजों में मूल्य संवर्धन के अवसर मिलेंगे।
ढाई साल में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू
खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 40 अन्वेषण प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। इस दौरान 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की जा चुकी है। इनसे करीब 4 लाख करोड़ रुपये के संभावित राजस्व की उम्मीद है।
केंद्र सरकार ने अब तक 56 ब्लॉक्स की नीलामी की
केंद्रीय खान मंत्रालय के सचिव केशव चंद्र ने बताया कि देश में क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक मिनरल्स के 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें से 56 ब्लॉक्स की नीलामी सफलतापूर्वक हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि देश का पहला लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक छत्तीसगढ़ के कटघोरा से नीलाम हुआ था।
केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और सामरिक मजबूती के लिए जरूरी है। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि खनन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों की सुविधाओं और रोजगार पर भी ध्यान देना जरूरी है।
मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि सरकार निवेशकों को हर स्तर पर सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने उद्योगों से केवल खनन में निवेश करने के बजाय प्रोसेसिंग और खनिज आधारित अन्य उद्योगों में भी निवेश करने की अपील की।
कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि और खनिज क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।



