
यूसीसी पर महिलाओं ने रखी बेबाक राय, संपत्ति और भरण-पोषण में बराबरी की मांग
PM मोदी के 25 साल के जनसेवा सफर को समर्पित ‘सेवा ज्योति यात्रा’
रायपुर, 7 अक्टूबर 2026। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर छत्तीसगढ़ महिला मंच और महाराष्ट्र मंडल महिला समिति की महिलाओं ने अपने सुझाव समिति के सामने रखे। बैठक में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, पैतृक संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
यूसीसी समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार ने महिलाओं की बात सुनी और उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया।
महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में बराबर अधिकार की मांग
शताब्दी पाण्डेय ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों को पैतृक और व्यक्तिगत संपत्ति में समान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने भरण-पोषण के नियमों में समानता और आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहते हैं, इसलिए यूसीसी बनाते समय उनकी परंपराओं, रीति-रिवाज और संस्कृति का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
पंचायत स्तर पर लोगों को कानूनी सहायता देने के लिए विशेष कानूनी सलाह डेस्क बनाने का सुझाव भी दिया गया।
लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीयन की मांग
श्वेता पड्डा ने लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीयन की मांग रखी। उनका कहना था कि इससे महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा बेहतर तरीके से हो सकेगी।
उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चों को पालन-पोषण और संपत्ति में अधिकार देने तथा उनकी जैविक पहचान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
कानून को आसान और भेदभाव रहित बनाने पर जोर
अधिवक्ता सुचित्रा वर्धन ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानूनी स्थिति में स्पष्टता की जरूरत बताई। वहीं अधिवक्ता हेमलता सिंह ने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य कानूनी भेदभाव कम करना और लोगों के लिए कानून को आसान बनाना होना चाहिए।
गीता श्याम दलाल ने ‘एक राष्ट्र, एक कानून’ की सोच का समर्थन करते हुए कहा कि अपराध को धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही हर व्यक्ति को अपनी परंपराओं और संस्कृति का पालन करने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए।
कमजोर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर भी चर्चा
आस्था अभय काले ने कहा कि कानून का फायदा समाज के अंतिम छोर पर रहने वाली कमजोर महिलाओं तक भी पहुंचना चाहिए। इसके लिए महिलाओं में कानूनी जागरूकता जरूरी है।
बैठक में महिलाओं ने बच्चों के अधिकार, आदिवासी समाज की भागीदारी और विवाह से जुड़ी पारंपरिक व्यवस्थाओं को लेकर भी अपने सुझाव दिए।
समिति ने महिलाओं की ओर से दिए गए सुझावों की सराहना की और भरोसा दिलाया कि इन व्यावहारिक सुझावों को आगे यूसीसी से जुड़े विचार-विमर्श में प्रमुखता से रखा जाएगा।



