
क्रिकेट कोचिंग से शुरू हुआ सफर, अब 600 से ज्यादा युवाओं को दे रहे फिटनेस की ट्रेनिंग
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नारायणपुर, 25 सितंबर 2026। अगर मेहनत करने का जज्बा हो और सही समय पर सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाए, तो छोटे शहर और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले युवा भी अपना रोजगार शुरू कर सकते हैं। नारायणपुर के पुष्पेन्द्र शतफर्मा की कहानी इसका उदाहरण है।
पुष्पेन्द्र कभी मैदान में बच्चों और युवाओं को क्रिकेट की ट्रेनिंग देते थे। आज वे नारायणपुर के बंगलापारा में ‘एक्सट्रीम फिटनेस हब’ चला रहे हैं, जहां 600 से ज्यादा युवा और नागरिक नियमित रूप से फिटनेस ट्रेनिंग ले रहे हैं।
क्रिकेट सिखाते हुए आया जिम खोलने का विचार
पुष्पेन्द्र ने अपने करियर की शुरुआत क्रिकेट कोच के रूप में की। वे स्थानीय क्रिकेट क्लब में बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षण देते थे और खिलाड़ियों को अंडर-19 स्तर तक तैयार करते थे।
खिलाड़ियों के साथ काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि अच्छा प्रदर्शन करने के लिए केवल खेल की ट्रेनिंग ही काफी नहीं है। इसके लिए शारीरिक फिटनेस और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
नारायणपुर में अच्छे फिटनेस सेंटर की कमी को देखते हुए उन्होंने अपना जिम शुरू करने का फैसला किया।
पैसे की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
फिटनेस सेंटर शुरू करने का सपना तो था, लेकिन पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में पुष्पेन्द्र ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, नारायणपुर से संपर्क किया।
विभाग के अधिकारियों ने उनकी योजना को समझा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत ऋण के लिए उनका प्रकरण तैयार कर बैंक भेजा।
5 लाख रुपये की लागत से शुरू हुआ फिटनेस हब
सरकारी योजना के तहत केनरा बैंक से मिली वित्तीय सहायता से पुष्पेन्द्र ने अपना सपना पूरा किया।
करीब 5 लाख रुपये की लागत से नारायणपुर के बंगलापारा में ‘एक्सट्रीम फिटनेस हब’ शुरू किया गया। इसमें 90 प्रतिशत राशि बैंक ऋण और 10 प्रतिशत राशि पुष्पेन्द्र ने अपनी तरफ से लगाई।
आज 600 से ज्यादा लोग उठा रहे फायदा
शुरुआत में छोटा व्यवसाय शुरू करने के उद्देश्य से खोला गया फिटनेस सेंटर अब नारायणपुर के युवाओं और नागरिकों के लिए स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
आज यहां 600 से अधिक पंजीकृत सदस्य नियमित रूप से व्यायाम और फिटनेस प्रशिक्षण ले रहे हैं।
सरकारी योजना से बदली जिंदगी
पुष्पेन्द्र बताते हैं कि सीमित पूंजी के साथ नारायणपुर जैसे क्षेत्र में जिम शुरू करना आसान नहीं था। सरकारी योजना, अधिकारियों के मार्गदर्शन और बैंक से मिली आर्थिक मदद से उनका सपना पूरा हो सका।
उनकी कहानी बताती है कि अगर मेहनत के साथ सही योजना और सरकारी सहायता का लाभ लिया जाए, तो स्वरोजगार शुरू करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़ा अवसर बनाया जा सकता है।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पुष्पेन्द्र की यह पहल युवाओं को अपने हुनर और सोच को रोजगार में बदलने की प्रेरणा देती है।



