
जशपुर की मनोरा और दुलदुला की महिलाओं ने शासकीय तालाब से शुरू किया मछली पालन, सालाना लाखों रुपये का कारोबार
रायपुर, 30 अगस्त 2026। जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने मेहनत और सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर अपनी जिंदगी बदलने की मिसाल पेश की है। मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों में मछली पालन शुरू किया और आज यही तालाब उनके लिए कमाई और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गए हैं।
शासकीय तालाब का पट्टा, विभाग की तकनीकी मदद और महिलाओं की मेहनत से मछली पालन का काम अब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
भभरी गांव में तालाब से सालाना करीब 6 लाख रुपये की बिक्री
मनोरा विकासखंड के भभरी गांव में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन साल से 0.700 हेक्टेयर के शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं। समूह को तालाब 10 साल के पट्टे पर मिला है।
समूह की महिलाएं हर साल करीब 3 क्विंटल मछली का उत्पादन करती हैं। इससे लगभग 6 लाख रुपये सालाना बिक्री हो रही है।
मछली पालन से हुई कमाई से महिलाओं की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है। अब वे घर के खर्च के साथ बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दूसरी जरूरतों में भी आर्थिक मदद कर पा रही हैं।
सिमड़ा की महिलाओं ने भी बनाया कमाई का रास्ता
दुलदुला विकासखंड के सिमड़ा गांव में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर के शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं।
समूह हर साल करीब 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन कर रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये की सालाना बिक्री हो रही है।
इस काम से महिलाओं को नियमित आय का साधन मिला है। समूह की महिलाएं अब अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में पहले से ज्यादा योगदान दे रही हैं और आर्थिक फैसलों में भी उनकी भूमिका बढ़ी है।
सरकारी मदद से महिलाओं को मिला नया रोजगार
महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा देने और मछली पालन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का नया रास्ता खुला है।
महिलाओं का कहना है कि पहले आमदनी के साधन सीमित थे और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था। मछली पालन शुरू होने के बाद उन्हें कमाई का नियमित जरिया मिला है।
दूसरी महिलाओं के लिए बनी मिसाल
कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता बताती है कि अगर सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ मिले और समूह मिलकर मेहनत करें तो गांव की महिलाएं भी अच्छा कारोबार खड़ा कर सकती हैं।
आज इन समूहों की महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ाने में योगदान दे रही हैं।
सरकारी तालाब अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जशपुर की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य का जरिया बन रहे हैं।



