
25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने सुरक्षा जवानों की कलाई पर बांधी राखी, महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ
रायपुर, 29 अगस्त 2026। बस्तर में इस बार रक्षाबंधन का त्योहार एक अलग ही तस्वीर लेकर आया। भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में कभी नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। करीब 25 साल तक नक्सली संगठन में रहने वाली मीना के लिए यह पल खास था। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में दूरी और संघर्ष की भावना होती थी, उसी वर्दी वाले जवान की कलाई पर उन्होंने राखी बांधी।
जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। राखी बांधने के बाद शगुन दिया, मिठाई खिलाई और भाई-बहन के रिश्ते को सम्मान दिया।
यह सिर्फ रक्षाबंधन मनाने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि बस्तर में विश्वास और भाईचारा बढ़ाने की एक कोशिश भी थी। लंबे समय तक हिंसा के कारण सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच जो दूरी बनी रही, उसे कम करने का यह एक मानवीय प्रयास नजर आया।
हाथ में हथियार नहीं, राखी थी
करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन में रहने वाली मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के जीवन में जंगल, संघर्ष और हथियार अतीत का हिस्सा रहे हैं। अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की राह चुनी है।
रक्षाबंधन के मौके पर जब ये महिलाएं सुरक्षा बल कैंप पहुंचीं तो उनके हाथ में हथियार नहीं, बल्कि राखी थी। उन्होंने जवानों की कलाई पर राखी बांधी और नए रिश्ते की शुरुआत की।
बस्तर में जहां कई वर्षों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे, वहां इस तरह राखी बांधना बदलाव की एक भावनात्मक तस्वीर बन गया।
महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ
कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान पूर्व नक्सली महिलाएं और सुरक्षा बल के जवान एक-दूसरे के सामने संघर्ष के दो पक्ष के रूप में नहीं, बल्कि भाई-बहन के रूप में नजर आए।

इस पहल का संदेश साफ था कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, उन्हें स्वीकार करने और उनके साथ विश्वास का रिश्ता बनाने की जरूरत है।
एसपी बोले- रिश्ते सामान्य होंगे
कांकेर एसपी श्री निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की समस्या के समाधान की दिशा में बढ़ाए जा रहे कदमों का यह रक्षाबंधन एक प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस रिश्ते के धागे से समाज और सुरक्षा बलों के बीच रिश्ते और सामान्य होंगे।
एसपी ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनसे लोगों में विश्वास बढ़ाने और मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया को मजबूत करने में भी मदद मिलती है।
मीना के लिए नई शुरुआत
करीब 25 साल तक नक्सली संगठन में रहने के बाद मुख्यधारा में लौटना मीना के लिए आसान नहीं रहा होगा। ऐसे में जवान की कलाई पर राखी बांधना उनके लिए सिर्फ एक त्योहार मनाना नहीं, बल्कि एक नए रिश्ते और नई जिंदगी की शुरुआत जैसा था।
जिस सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी सुरक्षा बल के जवान को भाई मानकर राखी बांधना यह दिखाता है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है।
बदल रहा है बस्तर
बस्तर की पहचान लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़ और डर से जुड़ी रही। लेकिन अब यहां बदलाव की कई तस्वीरें सामने आ रही हैं। हथियार छोड़कर लोग मुख्यधारा में लौट रहे हैं और गांवों में सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा दूसरी विकास योजनाओं का विस्तार हो रहा है।
इसी बदलाव के बीच भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन कार्यक्रम एक अलग मानवीय संदेश लेकर आया।
राखी के धागे में भरोसे का संदेश
राखी का धागा छोटा जरूर है, लेकिन इसका संदेश बड़ा है। यह उन लोगों को संदेश देता है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर लौटना चाहते हैं कि समाज में उनके लिए जगह है। साथ ही यह भी बताता है कि शांति के लिए सिर्फ हथियार छोड़ना ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच भरोसा पैदा करना भी जरूरी है।
बस्तर में इस बार राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी, बल्कि भरोसे और भाईचारे के रिश्ते पर बंधी।
जहां कभी बंदूक लोगों के बीच दूरी की वजह बनती थी, वहीं अब राखी का धागा रिश्ते जोड़ने की कोशिश कर रहा है। यही बदलते बस्तर की एक नई तस्वीर है।



