
छत्तीसगढ़ में शुरू होगा ‘हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान, घर-घर मिलेंगे पौधे
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रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में कुपोषण और एनीमिया की समस्या को कम करने के लिए राज्य सरकार ‘हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान शुरू करने जा रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल के तहत लोगों को मुनगा यानी सहजन के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य घर-घर पौधे लगाकर पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद करना है।
इस अभियान को लेकर मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इसमें विभिन्न विभागों को अभियान की तैयारी और क्रियान्वयन के संबंध में जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
मुनगा की पत्तियों और फलियों से मिलेगा पोषण
मुनगा यानी सहजन की पत्तियों और फलियों में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे नियमित भोजन में शामिल करने से संतुलित आहार की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है। खासकर बच्चों, महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर ध्यान देने के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, कुपोषण और एनीमिया से बचाव के लिए संतुलित आहार के साथ आवश्यक स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह भी जरूरी है।
फरवरी-मार्च में घर-घर बांटे जाएंगे पौधे
अभियान के तहत उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में मुनगा के पौधे तैयार किए जाएंगे। फरवरी से मार्च के दौरान इन पौधों को घर-घर निःशुल्क वितरित करने और उनका रोपण कराने की योजना है।
सभी जिलों में कलेक्टर अभियान की निगरानी करेंगे। पौधों की सुरक्षा, सिंचाई और देखभाल पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि लगाए गए पौधे जीवित रहें और आगे चलकर परिवारों को उनका लाभ मिल सके।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी लगेंगे पौधे
इस अभियान को केवल घरों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे लगाए जाएंगे।
राज्य के करीब 23,500 स्कूलों में मुनगा रोपण के साथ शाला पोषण वाटिका विकसित करने की योजना है। इसके अलावा मध्याह्न भोजन में मुनगा की भाजी शामिल करने पर भी जोर दिया जाएगा, जिससे बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
डिजिटल निगरानी से रखी जाएगी पौधों पर नजर
अभियान के तहत पौधों की स्थिति और देखभाल की जानकारी जुटाने के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड का उपयोग किया जाएगा। इससे पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा और जीवित रहने की स्थिति की निगरानी करने में मदद मिलेगी।
अलग-अलग विभागों को मिली जिम्मेदारी
महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान का नोडल विभाग होगा। विभाग आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राहियों की पहचान, पोषण संबंधी जागरूकता और निगरानी का काम करेगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ग्राम पंचायतों में उपयुक्त स्थानों की पहचान, पौध तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में भूमिका निभाएगा। वहीं, उद्यानिकी एवं कृषि विभाग गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार करने, रोपण तकनीक, जैविक खाद और पौधों की सुरक्षा के लिए तकनीकी सहयोग देगा। इस काम में वन विभाग की भी मदद ली जाएगी।
बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।



