कर्मा महोत्सव में मांदर लेकर थिरके मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, आदिवासी संस्कृति को बताया देश की प्रेरणा

 

 

रायगढ़, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गुरुवार को रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के ग्राम सारसमाल में आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए। यहां उन्होंने भगवान करम देव तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

 

कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की इस सहभागिता से आयोजन में मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला। उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र की ओर से आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।

 

आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा गौरवशाली

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति के प्रति श्रद्धा से भरा हुआ है। जल, जंगल और जमीन को बचाने की परंपरा आदिवासी समाज के जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की यह सीख आज पूरे देश और दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।

 

उन्होंने कहा कि कर्मा पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का उत्सव है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ते हैं।

 

भगवान बिरसा मुंडा और वीर नारायण सिंह के योगदान को किया याद

 

मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित जनजातीय महापुरुषों के संघर्ष और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महानायकों ने देश, समाज और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। नई पीढ़ी को उनके जीवन और संघर्ष से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है।

 

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकता है।

 

शिक्षा से आगे बढ़ेंगे युवा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर जोर

 

मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने का सबसे मजबूत माध्यम है। युवाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करनी चाहिए और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।

 

उन्होंने बताया कि आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रयास आवासीय विद्यालयों और नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट की गई है। इससे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को सुविधा मिलेगी।

 

उन्होंने युवाओं से प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

 

रोजगार और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को कौशल विकास, रोजगार मेलों, औद्योगिक गतिविधियों और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए काम कर रही है।

 

उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में आवास, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवार भी विकास योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

 

लोकगीत और कर्मा नृत्य ने बांधा समां

 

महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुषों ने मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर सामूहिक कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति प्रेम और सामूहिक जीवन की भावना की सुंदर झलक देखने को मिली।

 

राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया। उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला और कर्मा पर्व की परंपराओं के बारे में जानकारी दी।

 

कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर स्वागत किया। महोत्सव में बड़ी संख्या में समाज के लोग और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

 

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