
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा, अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
रायपुर, 14 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और आम लोगों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों, जांच सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक को जरूरत के समय बेहतर इलाज मिलना चाहिए। स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार केवल अस्पताल भवन बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वहां डॉक्टर, जरूरी दवाइयां, आधुनिक उपकरण और जांच की सुविधाएं भी उपलब्ध रहनी चाहिए।
जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक सुविधाएं बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कर्मचारियों या जांच सुविधाओं की कमी है, उनकी पहचान कर प्राथमिकता से समस्याओं को दूर किया जाए।
उन्होंने बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दीर्घकालिक योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। नवगठित जिलों में जरूरी चिकित्सा सुविधाओं को प्राथमिकता देने और अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर प्रसव सुरक्षित हो और मां तथा बच्चा दोनों स्वस्थ रहें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी जिम्मेदारी से काम करे।
उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। इसके साथ ही दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण, मलेरिया की रोकथाम, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
दुर्गम गांवों में एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो बनेगा दूसरा इंतजाम
वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जहां सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के तहत 375 एम्बुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के तहत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
अस्पतालों में शव वाहन की सुविधा भी होगी बेहतर
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को समय पर शव वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुख की घड़ी में परिवार को शव वाहन के लिए परेशान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं और मरीजों के परिवार की गरिमा का ध्यान रखने पर विशेष जोर दिया।
6 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी
चिकित्सा शिक्षा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और 6 निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त 6 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों, फैकल्टी और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में बेहतर शिक्षा के साथ मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज भी मिलना चाहिए।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 8 से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर 7 हो गई है। इसके अलावा पहली बार एलाइड हेल्थ के 11 पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इनके लिए 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी शुरू की गई हैं।
सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की जांच, परामर्श और उपचार सुविधाओं का विस्तार करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने और स्वैच्छिक जांच तथा आनुवंशिक परामर्श को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों तक परामर्श तथा उपचार सुविधाएं पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मोबाइल हेल्थ सेवाओं और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।
दिवाली से पहले खाद्य पदार्थों की होगी जांच
त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मिठाई, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। शहरों के साथ गांवों और दूरस्थ वनांचलों में भी लोगों को समय पर बेहतर उपचार मिलना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



