
राशन की मदद से सरिता के परिवार को मिली राहत, मजदूरी की कमाई में होने लगी बचत
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रायपुर, 28 सितंबर 2026। सरगुजा जिले के ग्राम सकालो चारपारा की रहने वाली सरिता पात्र अपने छह सदस्यीय परिवार के साथ मजदूरी करके घर चलाती हैं। पहले मजदूरी से मिलने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा घर के राशन पर खर्च हो जाता था। इससे परिवार की दूसरी जरूरतों के लिए पैसे बचाना मुश्किल होता था।
अब परिवार को राशन दुकान से चावल, चना और शक्कर मिलने से सरिता को काफी राहत मिली है। रोजमर्रा के खाने-पीने का सामान मिलने से राशन खरीदने में होने वाला खर्च कम हुआ है और मजदूरी की कमाई में कुछ पैसे बचने लगे हैं।
पहले राशन के लिए खर्च हो जाती थी कमाई
सरिता बताती हैं कि उनके परिवार में छह सदस्य हैं। सभी की जरूरतें मजदूरी की कमाई से ही पूरी होती थीं। चावल, तेल, नमक, शक्कर और दूसरी जरूरी चीजें खरीदने के बाद हाथ में बहुत कम पैसे बचते थे।
कम आमदनी में घर का खर्च चलाना मुश्किल होता था। कई बार दूसरी जरूरी चीजों के लिए भी पैसे की कमी महसूस होती थी।
अब राशन मिलने से मिली राहत
राशन दुकान से चावल, चना और शक्कर मिलने से परिवार का राशन खर्च कम हुआ है। अब मजदूरी से मिलने वाली कमाई का कुछ हिस्सा बच जाता है। इस बची राशि से परिवार अपनी दूसरी जरूरतें पूरी कर पा रहा है।
सरिता कहती हैं, “पहले मजदूरी के पैसे से ही चावल, तेल, नमक और शक्कर खरीदना पड़ता था। राशन मिलने के बाद अब थोड़ा पैसा बच जाता है, जिससे घर की दूसरी जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है।”
छह लोगों के परिवार को मिला सहारा
छह सदस्यीय परिवार के लिए नियमित राशन मिलना रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ी मदद साबित हो रहा है। खाने-पीने की जरूरी चीजों पर खर्च कम होने से परिवार को अपने सीमित बजट में दूसरी जरूरतों के लिए भी पैसे निकालने में आसानी हो रही है।
सरिता ने खाद्यान्न सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
सरिता के परिवार की कहानी बताती है कि नियमित राशन मिलने से मजदूरी करने वाले परिवारों को भोजन की चिंता कम करने में मदद मिल रही है। साथ ही, राशन पर होने वाला खर्च घटने से मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा परिवार की दूसरी जरूरतों के लिए बच पा रहा है।



