
मुर्गी पालन से रामबती ने कमाए 25 हजार रुपये, बिहान योजना बनी सहारा
रायपुर, 8 सितंबर 2026। ग्रामीण महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने में बिहान योजना मददगार साबित हो रही है। दंतेवाड़ा जिले की रामबती नाग ने इस योजना से जुड़कर मुर्गी पालन शुरू किया और अब तक करीब 25 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर चुकी हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना दंतेवाड़ा के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में करीब डेढ़ साल से चल रही है। इस योजना से अब तक लगभग 2,200 परिवारों को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा चुका है।
100 चूजों से शुरू किया काम
कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की रहने वाली रामबती नाग ने जिला प्रशासन की मदद से जून महीने में मुर्गी पालन शुरू किया। उन्हें 80 रुपये प्रति चूजे की दर से 100 चूजे और उनके लिए दाना उपलब्ध कराया गया।
शुरुआत में करीब 25 से 30 चूजों की बीमारी के कारण मौत हो गई। इससे रामबती को नुकसान हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। बचे हुए चूजों की अच्छी देखभाल की और उन्हें बड़ा किया।
अब तक रामबती करीब 25 हजार रुपये की शुद्ध आय कमा चुकी हैं। वह तैयार मुर्गों को करीब 500 रुपये प्रति किलो की दर से बेचती हैं। एक मुर्गे का वजन सामान्य तौर पर 1 से 3 किलो तक होता है।
ब्रुडिंग सेंटर से दो महिलाओं को फायदा
बिहान योजना के तहत महिलाओं को मुर्गी पालन से जोड़ने के लिए ब्रुडिंग सेंटर भी चलाए जा रहे हैं। क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार किया जा रहा है।
ये महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील नस्ल के एक दिन के चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग सेंटर में करीब 15 दिनों तक उनकी देखभाल करती हैं। इसके बाद स्वस्थ चूजों को दूसरी महिलाओं को पालन के लिए दिया जाता है।
इस व्यवस्था से चूजों को तैयार करने वाली महिला और मुर्गी पालन करने वाली महिला, दोनों को कमाई का मौका मिल रहा है।
450 से ज्यादा महिलाओं को मिला काम
दंतेवाड़ा जिले के अलग-अलग क्लस्टरों में अब तक 450 से ज्यादा ग्रामीण महिलाओं को मुर्गी पालन से जोड़ा जा चुका है। महिलाओं को उनकी जरूरत और क्षमता के अनुसार 50 से 100 तक चूजे दिए जाते हैं।
बिहान योजना की यह पहल महिलाओं को गांव में ही रोजगार और आमदनी का साधन दे रही है। रामबती की तरह कई महिलाएं मुर्गी पालन के जरिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।



