
भव्यता और परंपरा के साथ मनाया जाएगा बस्तर दशहरा, UNESCO की सूची में शामिल कराने की तैयारी
रायपुर, 8 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध 75 दिवसीय बस्तर दशहरा इस साल भी पूरे उत्साह और पारंपरिक तरीके से मनाया जाएगा। दशहरा की तैयारियों को लेकर मंगलवार को कलेक्टोरेट के प्रेरणा कक्ष में बस्तर दशहरा समिति की बैठक हुई। बैठक में पूजा-पाठ, सुरक्षा, साफ-सफाई, बजट और श्रद्धालुओं की सुविधाओं सहित कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता बस्तर सांसद और दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। इस दौरान बस्तर राजपरिवार के कमलचंद भंजदेव, कलेक्टर आकाश छिकारा, एसपी शलभ सिन्हा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना, मां दंतेश्वरी के पुजारी जिया बाबा सहित मांझी-चालकी, पुजारी और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
बलराम मांझी बने नए उपाध्यक्ष
बैठक में बस्तर दशहरा समिति के उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव कराया गया। सदस्यों ने हाथ उठाकर मतदान किया। मतदान में बलराम मांझी को बहुमत मिला, जिसके बाद उन्हें समिति का नया उपाध्यक्ष घोषित किया गया।
उन्होंने दशहरा से जुड़े देवस्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए।
बस्तर दशहरा को UNESCO की सूची में शामिल कराने की तैयारी
बैठक में बस्तर दशहरा को यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में मिलकर प्रयास करने की बात कही गई।
दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर दशहरा सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह बस्तर की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक एकता और लोगों की भागीदारी का बड़ा उदाहरण है।
उन्होंने दशहरा की व्यवस्थाओं के लिए एनएमडीसी से सीएसआर के तहत हर साल कम से कम डेढ़ करोड़ रुपये की स्थायी सहायता दिलाने की मांग करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि दशहरा के दौरान होने वाले प्रमुख पूजा स्थलों पर सुरक्षा रेलिंग, साफ-सफाई और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। साथ ही पर्व के दौरान समानांतर कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने पर भी जोर दिया।
1423 से चली आ रही परंपरा
बस्तर राजपरिवार के सदस्य और माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपरा वर्ष 1423 से लगातार चली आ रही है। उन्होंने इसे बस्तर की बेहद पुरानी और अनोखी सांस्कृतिक परंपरा बताते हुए UNESCO की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए सामूहिक प्रयास करने की बात कही।
उन्होंने मावली परघाव के दौरान रास्तों और संबंधित स्थानों की विशेष साफ-सफाई कराने तथा देवी-देवताओं के स्वागत की बेहतर व्यवस्था करने पर जोर दिया। मांझी-चालकी से पर्व के दौरान पारंपरिक वेशभूषा और पगड़ी पहनने की अपील भी की गई।
1.21 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित
बैठक में बस्तर दशहरा के लिए करीब 1 करोड़ 21 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया। इस राशि से पर्व के दौरान होने वाले विभिन्न पूजा कार्यक्रमों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं को पूरा करने की योजना है।
बैठक में पेयजल, बिजली, स्वच्छता, सुरक्षा, यातायात, पूजा स्थलों और श्रद्धालुओं की सुविधा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
प्रशासन ने तैयारियां तेज करने पर दिया जोर
कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा ने कहा कि बस्तर दशहरा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
उन्होंने प्रमुख पूजा स्थलों पर जरूरी सुविधाएं समय पर पूरा करने और सुरक्षा व यातायात व्यवस्था को मजबूत रखने के निर्देश दिए।
बैठक में मांझी-चालकी, पुजारी और समिति के सदस्यों ने भी दशहरा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पूजा व्यवस्थाओं को लेकर अपने सुझाव दिए। समिति का उद्देश्य इस साल बस्तर दशहरा को परंपरा और आधुनिक सुविधाओं के बेहतर तालमेल के साथ भव्य तरीके से आयोजित करना है।



