
रेडी-टू-ईट निर्माण से बदली महिलाओं की जिंदगी, सरस्वती स्व-सहायता समूह हर महीने कमा रहा 50 हजार रुपये
रायगढ़, 01 नवंबर 2026। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की पहल अब जमीन पर सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पूरक पोषण आहार निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे महिलाओं को रोजगार और नियमित आमदनी का अवसर मिल रहा है।
रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव की सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने इस योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। समूह की महिलाएं रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर हर महीने करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
बिहान योजना से मिला रोजगार, महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके समूह को आजीविका के नए अवसर मिले। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट निर्माण का काम मिला, जिसके बाद महिलाओं को नियमित आय का साधन उपलब्ध हुआ।
समूह की महिलाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार पोषण आहार तैयार करती हैं। इसके लिए गेहूं, चना, सोयाबीन सहित अन्य जरूरी सामग्री की मशीनों से सफाई, भुनाई, पिसाई और छनाई की जाती है। इसके बाद मिक्सिंग मशीन के माध्यम से सही अनुपात में मिश्रण तैयार कर वैज्ञानिक तरीके से पैकिंग की जाती है।
आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के आधार पर तैयार पोषण आहार का वितरण किया जाता है। इस काम से होने वाली आमदनी ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है। अब समूह की सदस्य अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान दे रही हैं।
जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रहा पोषण आहार
रायगढ़ जिले में संचालित कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत आर्थिक सहायता और पूंजीगत सब्सिडी भी दी जा रही है।
योजना के तहत नया खाद्य उद्योग स्थापित करने या पुराने उद्योग का विस्तार करने के लिए परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी देने का प्रावधान है। इसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है। वहीं स्व-सहायता समूह के सदस्यों को कार्यशील पूंजी के रूप में प्रति सदस्य 40 हजार रुपये की सहायता भी दी जाती है।
महिलाओं की कमाई के साथ बच्चों को मिल रहा पोषण
इस पहल से दोहरा लाभ मिल रहा है। एक ओर ग्रामीण महिलाएं समूह के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं के लिए पूरक पोषण आहार की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो रही है।
डूमरमुड़ा की सरस्वती स्व-सहायता समूह की सफलता बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी छोटे उद्योगों के माध्यम से अच्छी आमदनी कर सकती हैं। आज ये महिलाएं केवल अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग नहीं कर रहीं, बल्कि गांव में महिला आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बना रही हैं।



