
मुन्नी बाई ने मेहनत से बदली जिंदगी, पैक्ड पानी का कारोबार खड़ा कर 10 लोगों को दिया रोजगार
कोरिया, 30 सितंबर 2026। कभी परिवार चलाने के लिए खेतों में मजदूरी करने वाली ग्राम डुमरिया की मुन्नी बाई राजवाड़े ने मेहनत और सरकारी योजनाओं की मदद से अपनी जिंदगी बदल दी है। आज मुन्नी बाई खुद का पैक्ड पेयजल प्लांट चला रही हैं और उनके कारोबार से करीब 10 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
मुन्नी बाई ने बिहान योजना के तहत महालक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने नए सफर की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आजीविका से जुड़े कामों का प्रशिक्षण मिला। इसी दौरान रायपुर में प्रशिक्षण के समय उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के बारे में जानकारी मिली।
सरकारी योजना की जानकारी मिलने के बाद मुन्नी बाई ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से संपर्क किया और अपना व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया।
25 लाख रुपये का लोन लेकर शुरू किया प्लांट
मुन्नी बाई के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने गांव में जमीन लेकर पैक्ड पानी का प्लांट लगाने की योजना बनाई।
कई महीनों की प्रक्रिया के बाद पीएमईजीपी के तहत करीब 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इसके बाद शेड, बाउंड्री, बोरवेल और प्लांट के लिए जरूरी दूसरी व्यवस्थाएं तैयार की गईं।
प्रशिक्षण लेने के बाद मुन्नी बाई ने ‘एम हेल्प वॉटर’ नाम से पैक्ड पेयजल प्लांट शुरू किया।
अब 10 लोगों को मिल रहा रोजगार
मुन्नी बाई का कारोबार अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। प्लांट में उनके पति, बेटा-बेटी के साथ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और दूसरे कर्मचारी भी काम कर रहे हैं।
प्लांट से करीब 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। कर्मचारियों को काम के अनुसार लगभग 6 से 9 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है।
पानी की गुणवत्ता की जांच, बोतल भरने, पैकिंग और दूसरी प्रक्रियाओं के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। इससे गांव की महिलाओं और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही काम करने का मौका मिल रहा है।
गांव से निकलकर कई जिलों तक पहुंचा कारोबार
मुन्नी बाई के मुताबिक पिछले एक साल में करीब एक से डेढ़ लाख पानी की बोतलों की पैकिंग की जा चुकी है।
अब ‘एम हेल्प वॉटर’ की सप्लाई बैकुंठपुर के अलावा मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, अंबिकापुर, प्रतापपुर, विश्रामपुर, सूरजपुर, भैयाथान और कुदरगढ़ सहित आसपास के इलाकों में की जा रही है।
मुन्नी बाई के उद्यम को स्वयं सहायता समूह से मिली मदद, बैंक लिंकेज, प्रशिक्षण और उद्योग विभाग के सहयोग से आगे बढ़ने का मौका मिला।
मेहनत से बनीं आत्मनिर्भर
मुन्नी बाई का कहना है कि पीएमईजीपी जैसी योजनाओं से उन्हें अपना कारोबार शुरू करने का अवसर मिला। सरकारी मदद और मार्गदर्शन के साथ उन्होंने मेहनत की और आज वे खुद अपने पैरों पर खड़ी हैं।
अब वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रही हैं।
मुन्नी बाई की कहानी बताती है कि अगर मेहनत करने का हौसला हो और सही समय पर सरकारी योजनाओं की मदद मिल जाए, तो गांव की एक सामान्य महिला भी अपना कारोबार खड़ा कर सकती है।
उनका सफर यह भी दिखाता है कि एक महिला के आत्मनिर्भर बनने का फायदा केवल उसके परिवार को नहीं, बल्कि गांव के दूसरे लोगों को भी मिलता है।



