
मल्हनिया जलाशय में 54 केज से बदली मछुआरों की जिंदगी, 44 मछुआरा परिवारों को मिला रोजगार
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रायपुर, 29 सितंबर 2026। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड स्थित देवरगांव के मल्हनिया जलाशय में आधुनिक तरीके से मछली पालन ने मछुआरों की आय और रोजगार के नए रास्ते खोले हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और जिला खनिज न्यास निधि (DMFT) के सहयोग से यहां 54 केज लगाए गए हैं।
इस पहल से जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति से जुड़े 44 मछुआरों को मछली उत्पादन के साथ नियमित रोजगार का अवसर मिल रहा है।
44 मछुआरे समिति से जुड़े
जय बूढ़ा देव मल्हनिया आदिवासी मछुआ सहकारी समिति वर्ष 2002 से काम कर रही है। वर्तमान में इसमें 44 मछुआ आदिवासी सदस्य जुड़े हैं। इनमें 26 सदस्य बैगा समुदाय से हैं।
पहले समिति के सदस्य मुख्य रूप से जलाशय में पारंपरिक तरीके से मछली पकड़कर अपनी आजीविका चलाते थे। खर्च निकालने के बाद समिति की सालाना आय करीब 2.5 से 3 लाख रुपये तक सीमित थी।
54 केज से शुरू हुआ आधुनिक मछली पालन
मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए जलाशय में केज कल्चर यानी पिंजरे में मछली पालन शुरू किया गया। योजना और DMFT के सहयोग से कुल 54 केज स्थापित किए गए।
इन केज में उन्नत प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा रहा है। इससे पारंपरिक मछली पकड़ने के अनुभव के साथ आधुनिक तकनीक भी जुड़ गई है।
सालभर में 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री
केज कल्चर शुरू होने के बाद समिति की आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। समिति के अनुसार, एक साल में करीब 10 से 15 लाख रुपये की मछली बिक्री हुई है।
वर्तमान में केज में करीब 10 से 15 टन मछली उपलब्ध बताई गई है। समिति के सदस्यों के अनुसार, केज कल्चर से उन्हें प्रतिमाह करीब 6 से 7 हजार रुपये की आय हो रही है।
पारंपरिक काम के साथ मिला नया रोजगार
केज कल्चर से मछुआरों की केवल आय ही नहीं बढ़ी, बल्कि रोजगार का आधार भी मजबूत हुआ है। अब उन्हें सिर्फ पारंपरिक मत्स्याखेट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
मछली पालन, केज की देखभाल और बिक्री जैसी गतिविधियों से समिति के सदस्यों को लगातार काम मिल रहा है।
सरकारी योजना और स्थानीय मेहनत का परिणाम
मल्हनिया जलाशय में केज कल्चर यह दिखाता है कि सरकारी योजना के साथ स्थानीय लोगों का अनुभव और मेहनत जुड़ने से आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत आधुनिक तकनीक के जरिए मछली उत्पादन बढ़ाने और मछुआरों की आय एवं रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे मछुआरे
मल्हनिया जलाशय में 54 केज के जरिए शुरू हुआ आधुनिक मछली पालन अब मछुआरा परिवारों के लिए आय और रोजगार का नया आधार बन रहा है। पारंपरिक मत्स्याखेट के साथ आधुनिक तकनीक अपनाकर समिति के सदस्य अपनी आजीविका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



