
काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़कर लिया 1 लाख रुपए का ऋण, एक एकड़ में खीरे की खेती से बढ़ी आमदनी की उम्मीद
अम्बिकापुर, 27 अगस्त 2026। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं ऋण और संस्थागत सहयोग के माध्यम से कृषि, पशुपालन, मछली पालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को आजीविका का साधन बना रही हैं।
इसी बदलाव की प्रेरक कहानी है अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की श्रीमती सुभद्रा मंडल की। सुभद्रा ने काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद समूह के माध्यम से 1 लाख रुपए का ऋण लिया। इस राशि का उपयोग उन्होंने एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू करने के लिए किया। अब उन्हें खेती से अतिरिक्त आमदनी होने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
पूंजी की कमी बनी थी खेती के विस्तार में बाधा
सुभद्रा मंडल बताती हैं कि पहले आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वह बड़े स्तर पर खेती नहीं कर पाती थीं। परिवार की आमदनी सीमित होने के कारण रोजमर्रा की जरूरतों के बाद खेती में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती थी।
खेती को परिवार की आय का मजबूत साधन बनाने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में बिहान से जुड़ना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया।
समूह से मिला ऋण तो खेती को मिला नया विस्तार
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुभद्रा को ऋण सुविधा मिली। उन्होंने इस आर्थिक सहयोग का उपयोग कृषि गतिविधि शुरू करने में किया और एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती प्रारंभ की।
सुभद्रा के अनुसार, समूह से मिला ऋण उनके लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं था, बल्कि इससे उन्हें खुद कुछ करने का आत्मविश्वास भी मिला। अब वह मेहनत के साथ खेती में उत्पादन बढ़ाने और परिवार की आमदनी में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
‘लखपति दीदी’ बनने का लक्ष्य
सुभद्रा मंडल का लक्ष्य खेती से होने वाली आमदनी को बढ़ाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करना है। उनका कहना है कि खीरे की खेती से होने वाले लाभ को भविष्य में अन्य आजीविका गतिविधियों में लगाया जाएगा, ताकि आय के स्थायी साधन विकसित किए जा सकें।
उनका सपना आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना और ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। उनके लिए खेती अब केवल पारंपरिक काम नहीं, बल्कि परिवार के बेहतर भविष्य और आर्थिक मजबूती का माध्यम बन गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार
सुभद्रा मंडल ने बिहान से जुड़ने और समूह के माध्यम से ऋण सुविधा प्राप्त होने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी मेहनत को आय के अवसर में बदलने का रास्ता मिला।
उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिले आर्थिक सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का आधार दिया है। अब वह खेती के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।
महिलाओं की मेहनत को मिल रहा संस्थागत सहयोग
बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। महिलाएं अपनी स्थानीय परिस्थितियों और रुचि के अनुसार अलग-अलग आजीविका गतिविधियां अपना रही हैं।
सुभद्रा मंडल की कहानी इसी बदलाव की एक मिसाल है। स्व-सहायता समूह, संस्थागत ऋण और महिला की मेहनत ने मिलकर उनके लिए आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है। एक एकड़ में शुरू हुई खीरे की खेती अब उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आय और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गई है।
“बहनों की खुशहाली एवं आत्मनिर्भरता का उपहार, विष्णु भैया की सरकार।”



