नशे के कारोबार के पीछे छिपे पैसों के नेटवर्क पर पुलिस की नजर

मंत्री राजेश अग्रवाल ने सुनी लोगों की समस्याएं, अधिकारियों को जल्द समाधान के निर्देश

 

रायपुर, 30 सितंबर 2026। नशे के कारोबार पर कार्रवाई अब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पैसे के पूरे नेटवर्क का पता लगाने और अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई करने पर भी जोर दे रही है।

 

इसी उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में नारकोटिक्स मामलों की फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन यानी आर्थिक जांच पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रदेशभर से उप पुलिस अधीक्षक से लेकर सहायक उप निरीक्षक स्तर तक के 70 पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

 

अवैध संपत्ति की पहचान और जब्ती पर जोर

 

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, नारकोटिक्स अमित कुमार ने कहा कि नशे के मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के साथ-साथ नशे के कारोबार से कमाई गई अवैध संपत्ति की पहचान और जब्ती भी जरूरी है।

 

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह पता लगाना जरूरी है कि नशे की खेप कहां से आ रही है, कौन इसकी सप्लाई कर रहा है और यह किन लोगों तक पहुंच रही है। इसके साथ पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सकती है।

 

नशे के कारोबार में पैसा कहां से आ रहा, इसकी होगी जांच

 

कार्यशाला में अधिकारियों को बताया गया कि वित्तीय जांच के जरिए नशे के अवैध कारोबार से जुड़े पैसों के स्रोत और उनके इस्तेमाल का पता लगाया जा सकता है।

 

जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अवैध कमाई को कहां निवेश किया जा रहा है और किन माध्यमों से उसका लेन-देन किया जा रहा है।

 

चार स्तरों पर काम करने की जरूरत

 

उप पुलिस महानिरीक्षक, नारकोटिक्स पारुल माथुर ने कहा कि एनडीपीएस मामलों की जांच में कई एजेंसियों की भूमिका होती है। उन्होंने नशे के खिलाफ कार्रवाई में चार स्तरों पर काम करने की जरूरत बताई—

 

– नशे की सप्लाई कम करना

– नशे की मांग कम करना

– नशे से होने वाले नुकसान को कम करना

– नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर काम करना

 

उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से अवैध तरीके से बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

इनकम टैक्स और GST जांच की भी जानकारी

 

कार्यशाला के पहले सत्र में इनकम टैक्स इन्वेस्टिगेशन विंग, रायपुर के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश चंद्र चौहान ने वित्तीय जांच से जुड़े विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वित्तीय जांच के माध्यम से अवैध धन के स्रोत और उसके निवेश की जानकारी जुटाई जा सकती है।

 

दूसरे सत्र में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड नारकोटिक्स, रायपुर के अधिकारी सलमान इम्तियाज हुसैनी ने GST से जुड़े रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन के विश्लेषण के बारे में जानकारी दी।

 

कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनामिका जैन सहित पुलिस मुख्यालय के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

 

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को नारकोटिक्स मामलों में आरोपियों के साथ-साथ उनके पीछे काम कर रहे आर्थिक नेटवर्क की पहचान और उस पर कानूनी कार्रवाई के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना रहा।

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