नक्सलवाद का अंधेरा छोड़ शर्मिला ने थामी स्वावलंबन की सुई

 

रायपुर, 06 अप्रैल 2026/ बस्तर संभाग के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद अब हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले युवाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखने लगा है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल बीजापुर की शर्मिला पोयामी हैं, जिन्होंने कभी हाथों में बंदूक थामी थी, लेकिन आज वे लाइवलीहुड कॉलेज में सुई-धागे से अपने और अपने परिवार के भविष्य के सपने बुन रही हैं।

 

हिंसा के रास्ते से मुख्यधारा का सफर

 

बीजापुर जिले के भैरमगढ़ ब्लॉक की रहने वाली 19 वर्षीय शर्मिला कभी एरिया कमेटी की सक्रिय सदस्य थीं। गुरिल्ला युद्ध और हथियारों का प्रशिक्षण लेने वाली शर्मिला को जल्द ही अहसास हो गया कि प्रगति का मार्ग बंदूक से नहीं, बल्कि शांति और शिक्षा से निकलता है। इसी संकल्प के साथ उन्होंने 07 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया।

 

कौशल विकास से आत्मनिर्भरता की ओर

 

राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत शर्मिला को दंतेवाड़ा के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। बीते 45 दिनों से वे यहाँ सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं। अब वे सूट और ब्लाउज सिलना सीख रही हैं। प्रशिक्षण के बाद उनका लक्ष्य अपने गाँव में सिलाई केंद्र खोलना और अपनी 4 एकड़ जमीन पर खेती कर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

 

सुविधाओं ने बदला नजरिया

 

शर्मिला ने बताया कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। कॉलेज में अंडा, मछली, चिकन और हरी सब्जियां दी जा रही हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। बढ़ते आत्मविश्वास के कारण उन्होंने हाल ही में जगदलपुर में आयोजित मैराथन दौड़ में भी हिस्सा लिया। उनकी बड़ी बहन भी अब मुख्यधारा में लौटकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

 

गाँव के विकास की उम्मीद

 

अब शर्मिला अपने गाँव के विकास के लिए भी सोच रही हैं। वे चाहती हैं कि सड़क और पानी जैसी समस्याएं जल्द दूर हों ताकि विकास गाँव तक पहुंचे। उनका यह सफर हिंसा से विकास की ओर बढ़ते नए छत्तीसगढ़ की पहचान बन रहा है।

 

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