
छत्तीसगढ़ में संक्रामक रोगों की जांच और वैक्सीन रिसर्च को मिलेगी गति, कृषि विश्वविद्यालय में स्थापित हुई BSL-3 लैब
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22-23 अक्टूबर को आएंगी छत्तीसगढ़, तैयारियों को लेकर लोकभवन में बैठक
रायपुर, 12 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इससे संक्रामक रोगों की पहचान, उनके अध्ययन, वैक्सीन और उपचार संबंधी अनुसंधान तथा आधुनिक जांच तकनीकों के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह प्रयोगशाला प्रदेश में उच्चस्तरीय जैव-सुरक्षा अनुसंधान को नई दिशा देगी। कृषि और पशुपालन पर आधारित छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के लिए इस तरह की वैज्ञानिक सुविधा विशेष महत्व रखती है।
क्या है BSL-3 प्रयोगशाला और क्यों है जरूरी?
BSL-3 यानी बायोसेफ्टी लेवल-3 प्रयोगशाला ऐसी विशेष सुविधा है, जहां निर्धारित उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के तहत कुछ गंभीर संक्रामक रोगजनकों पर वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। इसमें संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित रखने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
इस प्रयोगशाला से संक्रामक रोगों की पहचान, उनकी निगरानी और रोगों के प्रसार को समझने से जुड़े अनुसंधान में मदद मिल सकती है। साथ ही वैक्सीन, उपचार और उन्नत जांच तकनीकों के विकास के लिए भी वैज्ञानिकों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों पर भी होगा अनुसंधान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह प्रयोगशाला पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों के अध्ययन में उपयोगी साबित होगी। विशेष रूप से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों की निगरानी और अध्ययन को इससे मजबूती मिल सकती है।
इस सुविधा से रोगों की समय पर पहचान, संभावित प्रकोप से निपटने की तैयारी और वैज्ञानिक जांच की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित लैब
यह प्रयोगशाला छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत स्थापित की गई है। इसका लोकार्पण 28 सितंबर 2026 को किया गया था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना की।
‘वन हेल्थ’ की दिशा में मिलेगी मदद
‘वन हेल्थ’ का अर्थ है मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानकर काम करना। इस दृष्टिकोण के तहत बीमारियों की निगरानी, उनके कारणों का अध्ययन और समय रहते रोकथाम के उपाय विकसित किए जाते हैं।
BSL-3 प्रयोगशाला से कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच समन्वय बढ़ाने की संभावना है। इससे किसानों और पशुपालकों से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समझने में भी मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को मिलेंगे नए अवसर
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पहले से कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और प्रयोगशाला आधारित परीक्षणों में योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मिट्टी, पानी और फसल अवशेषों के परीक्षण एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
नई BSL-3 प्रयोगशाला से वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और प्रयोगशाला तकनीशियनों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण और अनुसंधान के अवसर मिल सकेंगे। इससे प्रदेश में कुशल वैज्ञानिक मानव संसाधन विकसित करने और आधुनिक अनुसंधान तकनीकों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह प्रयोगशाला भविष्य में संक्रामक रोगों के अध्ययन, जैव-सुरक्षा, रोग निगरानी और प्रकोप से निपटने की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा मिलने के साथ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता भी मजबूत होगी।



