
घोंघा और अरपा-भैंसाझार से किसानों को मिल रहा सिंचाई का पानी, बढ़ रहा सिंचित क्षेत्र
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बिलासपुर, 5 अक्टूबर 2026। खेती के लिए समय पर पानी मिलना किसानों के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है। बिलासपुर जिले में घोंघा मध्यम जलाशय और अरपा-भैंसाझार बैराज परियोजना किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचने से किसानों को खेती में काफी मदद मिल रही है।
49 गांवों के खेतों तक पहुंच रहा घोंघा का पानी
कोटा विकासखंड के ग्राम पटैता में बना घोंघा मध्यम जलाशय आसपास के 49 गांवों के किसानों के लिए सिंचाई का बड़ा सहारा है। इस परियोजना से करीब 8,343 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल रही है।
करीब 104.20 किलोमीटर लंबी मुख्य, शाखा और वितरक नहरों के जरिए जलाशय का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाता है।
घोंघा परियोजना की शुरुआत वर्ष 1979 में हुई थी और इसका निर्माण 1981 में पूरा हुआ। जलाशय में करीब 3 करोड़ 7 लाख घन मीटर पानी रखने की क्षमता है। यहां मत्स्य पालन से स्थानीय लोगों को रोजगार और आजीविका का अवसर भी मिल रहा है।
अरपा-भैंसाझार से बढ़ेगा सिंचित क्षेत्र
अरपा-भैंसाझार बैराज परियोजना से भी बड़ी संख्या में किसानों को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2025-26 में 13,165 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की गई थी।
वर्ष 2026-27 में 17,900 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। यानी पिछले साल की तुलना में करीब 4,735 हेक्टेयर ज्यादा जमीन तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है।
इस परियोजना की कुल सिंचाई क्षमता करीब 25 हजार हेक्टेयर है।
नहरों के जरिए खेतों तक पहुंच रहा पानी
अरपा-भैंसाझार परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में पूरा हुआ था। परियोजना के तहत करीब 56.640 किलोमीटर मुख्य नहर, 102.600 किलोमीटर वितरक नहर और 21.130 किलोमीटर शाखा नहर बनाई गई है।
इन नहरों के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे किसानों को फसलों के लिए पानी की उपलब्धता मिल रही है और क्षेत्र में खेती को बढ़ावा मिल रहा है।
घोंघा और अरपा-भैंसाझार दोनों परियोजनाएं किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन बन रही हैं। इससे न केवल खेतों तक पानी पहुंच रहा है, बल्कि सिंचित क्षेत्र बढ़ने से कृषि गतिविधियों को भी मजबूती मिल रही है।



