
55 हेक्टेयर में लहलहा रही अरहर, किसानों के खेतों में दिखाई जा रही उन्नत खेती की तकनीक
हर शहर की जरूरत के हिसाब से बने विकास की योजना: सोनमणि बोरा
सरगुजा, 26 सितंबर 2026। सरगुजा जिले में किसानों को अरहर की बेहतर खेती की तकनीक सिखाने के लिए खेतों में ही इसका प्रदर्शन किया जा रहा है। आत्मनिर्भरता दलहन मिशन के तहत जिले के पांच गांवों में किसानों के खेतों पर करीब 55 हेक्टेयर में अरहर की उन्नत किस्में लगाई गई हैं।
इन खेतों में छत्तीसगढ़ अरहर-1 और छत्तीसगढ़ अरहर-2 की फसल अच्छी तरह बढ़ रही है। अभी फसल फूल आने की शुरुआती अवस्था में पहुंच गई है।
पांच गांवों में किसानों के खेत बने डेमो सेंटर
कृषि विज्ञान केंद्र सरगुजा की ओर से अम्बिकापुर विकासखंड के सोहगा, बरकेला, खजुरी और नानदमाली तथा उदयपुर विकासखंड के कुमडेवा गांव में किसानों के खेतों पर अरहर की उन्नत खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य किसानों को सिर्फ कागज या प्रशिक्षण के जरिए जानकारी देना नहीं, बल्कि खेत में फसल दिखाकर बेहतर तकनीक समझाना है।
फसल की अच्छी बढ़वार से किसान उत्साहित
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदर्शन वाले खेतों में अरहर के पौधों की हरियाली, ऊंचाई और शाखाओं का विकास अच्छा दिखाई दे रहा है। अब फसल में फूल और आगे चलकर फलियां बनने का समय है।
इस दौरान फसल की सही देखभाल बहुत जरूरी है। किसानों को खेत में नमी बनाए रखने, खरपतवार हटाने और कीट व रोगों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
खासकर फूल और फली बनने के समय फली छेदक जैसे कीटों की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशक का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
किसानों को बीज उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा
कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों का सीड हब के तहत बीज पंजीयन भी कराया गया है। इससे किसान आगे उन्नत किस्मों के बीज तैयार करने की तकनीक सीख सकेंगे।
इससे स्थानीय स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाले दलहन बीज का उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिक खेतों तक पहुंचकर दे रहे जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक किसानों को खेत पर ही अरहर की खेती से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। इनमें संतुलित खाद-पोषण, खरपतवार नियंत्रण, फसल प्रबंधन और कीट नियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि फूल आने से पहले फसल की सही देखभाल करने से आगे फूल और फलियों के विकास पर अच्छा असर पड़ सकता है।
प्रदर्शन वाले खेतों में फसल की अच्छी स्थिति देखकर किसानों में भी उन्नत तकनीक से अरहर का उत्पादन बढ़ाने को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है।



