PSSOU के दो अहम MOU, शिक्षा और जनजातीय शोध को मिलेगा नया मंच

 

रायपुर, 18 सितंबर 2026। पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। विश्वविद्यालय ने महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MUMT), बिलासपुर और जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ MOU किया है।

 

इन समझौतों के जरिए अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त शोध, प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, नवाचार और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।

 

डिजिटल शिक्षा और अकादमिक गतिविधियों पर भी सहयोग

 

MUMT के साथ हुए समझौते में दोनों संस्थानों के बीच शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण, नवाचार और संस्थागत विकास से जुड़े कार्यों में सहयोग की बात कही गई है।

 

इसके तहत संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यान और अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। अंतर्विषयी अध्ययन और पाठ्यचर्या से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

 

दोनों संस्थान MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल सामग्री और स्व-अध्ययन सामग्री तैयार करने में भी सहयोग कर सकेंगे।

 

संयुक्त शोध और प्रकाशन को मिलेगा बढ़ावा

 

MOU के तहत संयुक्त शोध, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित शोध और परामर्श जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।

 

शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए शोध पद्धति, प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट वर्क, शैक्षणिक भ्रमण, क्षेत्रीय अनुभव, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता से जुड़े अवसर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

 

जनजातीय समाज से जुड़े विषयों पर होगा विशेष अध्ययन

 

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के साथ हुए समझौते में जनजातीय समाज और अनुसूचित जनजातियों से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त अध्ययन और शोध को प्रमुखता दी गई है।

 

सम्मेलन, संगोष्ठी, प्रकाशन और ज्ञान-साझाकरण जैसी गतिविधियों के जरिए जनजातीय विषयों पर अकादमिक चर्चा को आगे बढ़ाया जाएगा।

 

केंद्र रणनीति बनाने, योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और कार्य-रोडमैप तैयार करने में बौद्धिक सहयोग भी प्रदान करेगा। जरूरत के अनुसार अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान उपलब्ध कराया जा सकेगा।

 

दो सदस्यीय समिति करेगी समन्वय

 

MOU के तहत प्रस्तावित गतिविधियों के संचालन और निगरानी के लिए दोनों पक्षों की ओर से एक-एक प्रतिनिधि वाली दो सदस्यीय संचालन समिति बनाने का प्रावधान किया गया है।

 

बौद्धिक संपदा, स्वामित्व और ज्ञान-साझाकरण जैसे मामलों को संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किया जाएगा।

 

विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को मिलेंगे नए अवसर

 

विश्वविद्यालय के अनुसार दोनों समझौतों का उद्देश्य विशेषज्ञता और संसाधनों को साझा करते हुए संस्थागत सहयोग को जमीन पर उतारना है। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए शिक्षा और शोध से जुड़े नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

 

वहीं जनजातीय अनुसंधान से जुड़े MOU के माध्यम से जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और वर्तमान मुद्दों पर अध्ययन को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

 

इस अवसर पर PSSOU की ओर से कुलपति प्रो. वी. के. सारस्वत और कुलसचिव चंद्रभूषण मिश्र मौजूद रहे। MUMT की ओर से कुलपति प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी और कुलसचिव डॉ. विजय गरुडिक शामिल हुए।

 

जनजातीय अनुसंधान एवं ज्ञान केंद्र, नई दिल्ली की ओर से प्रदेश समन्वयक राजीव शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सुरंगे उपस्थित रहे।

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