सिम्स बिलासपुर की बड़ी उपलब्धि: एक वर्ष में 10 हजार यूनिट से अधिक रक्त संग्रह, हजारों जिंदगियों को मिला नया जीवन
बिलासपुर, 24 अप्रैल 2026 ।छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के रक्त केंद्र ने वित्तीय वर्ष 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के दौरान कुल 10,043 यूनिट रक्त संग्रह कर हजारों मरीजों के जीवन को नई उम्मीद दी है।
यह उपलब्धि केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी प्रतीक है। सिम्स ने सिकल सेल, थैलेसीमिया और कैंसर जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों को बिना डोनर के भी नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराकर समाज के सामने एक मिसाल पेश की है।
सेवा और समर्पण का विजन
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि:
“हमारा उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी मरीज संसाधनों के अभाव में वंचित न रहे। 10 हजार यूनिट का आंकड़ा हमारे स्टाफ की मेहनत और जनता के भरोसे का परिणाम है।”
बेहतर प्रबंधन से आसान हुई उपलब्धता
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बी.पी. सिंह ने बताया कि:
“ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। बेहतर इन्वेंट्री मैनेजमेंट के कारण आपातकालीन स्थिति में भी तुरंत रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। 33 रक्तदान शिविरों के माध्यम से बड़ी मात्रा में संग्रह संभव हुआ।”
सामाजिक सहभागिता की बड़ी भूमिका
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने स्वैच्छिक रक्तदान की महत्ता बताते हुए कहा:
“रक्त का कोई विकल्प नहीं है, यह केवल दान से ही प्राप्त होता है। इस उपलब्धि में स्वैच्छिक रक्तदाताओं और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।”
विशेष रूप से संत निरंकारी मंडल जैसे संगठनों का योगदान सराहनीय रहा है।
रक्त संग्रह एवं उपयोग (2025-26)
कुल रक्त संग्रह: 10,043 यूनिट
स्वैच्छिक (इन-हाउस): 3,541 यूनिट
रक्तदान शिविर (33): 1,340 यूनिट
परिजनों द्वारा (रिप्लेसमेंट): 5,162 यूनिट
घटक (Components) उपयोग:
लाल रक्त कणिकाएं (RBC): 4,282 यूनिट
प्लाज्मा: 977 यूनिट मरीजों हेतु, 2,260 यूनिट दवा निर्माण हेतु
प्लेटलेट्स: 221 यूनिट (डेंगू व अन्य संक्रमण में उपयोग)
मानवीय पहल: बिना डोनर के नि:शुल्क रक्त
सिम्स प्रबंधन ने थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों के लिए विशेष व्यवस्था लागू की है। ऐसे मरीजों को बार-बार रक्त की आवश्यकता होती है, जिसे बिना किसी प्रतिस्थापन (Replacement) के प्राथमिकता से उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा, दुर्लभ (नेगेटिव) ब्लड ग्रुप के लिए एक विशेष डेटाबेस तैयार किया गया है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके।
जनता से अपील
सिम्स प्रबंधन ने आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे रक्तदान को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।
एक यूनिट रक्तदान = तीन जिंदगियों की रक्षा
यह उपलब्धि सिम्स बिलासपुर को न केवल एक चिकित्सा संस्थान, बल्कि मानवता की सेवा का केंद्र बनाती है।



