
Breaking news:गुरु पूर्णिमा पर उन सभी गुरुओं को नमन वदन करती जिनके बताए मार्ग पर चलकर आज मैं भी गुरु के पद पर हूँ
गुरु पूर्णिमा पर उन सभी गुरुओं को नमन वदन करती जिनके बताए मार्ग पर चलकर आज मैं भी गुरु के पद पर हूँ
गुरु शिष्य रिश्ते में बदलाव;-गुरु पूर्णिमा पर विशेष
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन हर साल गुरु पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है इसे गुरु पूर्णिमा पर्व कहा जाता है गुरु शिष्य परंपरा अति प्राचीन काल से चली आ रही हैं लेकिन वर्तमान में इसके स्वरूप में बदलाव आया है ,न अब प्राचीन काल के जैसे गुरु है और नहीं शिष्य जोअपने गुरु आज्ञा के लिए गुरुकुल में रहा करते थे परंतु यह नहीं कहा जा सकता कि यह परंपरा विलुप्त हो चुकी है आज भी गुरु शिष्य परंपरा समय के बदलाव के अनुरूप चल रही है ,आज भी यह परंपरा जीवित है । मान्यता है कि गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं ,गुरु की महिमा को महत्व देने के लिए महाभारत के महान गुरु वेदव्यास जी के जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है इसी दिन भगवान शिव द्वारा हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने अपने सात अनुयायियों (सप्त ऋषि यों )को योग का ज्ञान दिया और इस तरह एक गुरु बन गए । दूसरा बौद्ध धर्म का यह त्यौहार बुद्ध को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है ,जिन्होंने बौद्ध धर्म की नींव रखी बौध्द धर्म को मानने वाले इस पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद उत्तर प्रदेश के सारनाथ शहर में अपना पहला उपदेश दिया था तभी से उनकी पूजा के लिए गुरु पूर्णिमा के पर्व को मनाया जाता है ज्ञान और शिक्षा से जुड़ा होने के कारण इसको ज्ञान पूर्णिमा के रूप में भी पुकारा जाता है हिंदुओं के अलावा बौद्ध ,जैन और सिख भी गुरु पूर्णिमा पर्व को पूरी निष्ठा आस्था के साथ मनाते हैं वर्तमान समय में गुरु शिष्य परंपरा में जो बदलाव दिखाई देता है वह समय की मांग के अनुरूप कहा जा सकता है । गुरु आज किताबी ज्ञान के साथ ही विद्यार्थियों को टेक्नो फ्रेंडली शिक्षा देने की सलाह दे रहे हैं यदि हम किसी भी युग की बात करें हर युग में गुरु का एक ही लक्ष्य एक ही उद्देश्य उसका सिर्फ शिष्य का बेहतर करें उससे भी आगे बढ़े ,केवल किताबी ज्ञान में ही पारंगत ना हो उसका सर्वांगीण विकास हो।
वह आत्मनिर्भर बन सके अपने अपना एवं अपने माता-पिता के नाम के साथ अपने गुरु का भी नाम रोशन करें।



