
मछली पालन ने बदली किसानों की किस्मत, महासमुंद में बढ़ रही अतिरिक्त कमाई
महासमुंद, 15 सितंबर 2026। धान की पारंपरिक खेती के साथ अब महासमुंद जिले के किसान मछली पालन को भी अपनी आमदनी का मजबूत जरिया बना रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से जिले के करीब 150 किसान मछली पालन, हैचरी, पाउंड लाइनर और दूसरी गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।
सरकारी अनुदान और जरूरी सुविधाओं की मदद से गांवों में स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
बिरकोनी के दिनेश चंद्राकर ने शुरू किया मछली पालन

बिरकोनी निवासी दिनेश चंद्राकर ने पारंपरिक खेती के साथ मछली पालन शुरू करने का फैसला किया। खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लिया।
दिनेश ने करीब 7.50 लाख रुपए की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब तैयार कराया। इसके साथ ही लगभग 14 लाख रुपए की लागत से 20 हजार वर्गफुट में मछली हैचरी भी स्थापित की।
हैचरी में तैयार होने वाले मछली के बच्चों को तालाब में डाला जाता है। करीब 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है।
70-80 रुपए की लागत, 120-150 रुपए तक बिक्री
दिनेश चंद्राकर के अनुसार मछली उत्पादन में लगभग 70 से 80 रुपए प्रति किलो तक लागत आती है, जबकि बाजार में मछली करीब 120 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिक जाती है। इससे उन्हें खेती के मुकाबले अतिरिक्त और अच्छी आमदनी मिल रही है।
मछली पालन ने उनके लिए आय का एक नया रास्ता खोल दिया है।
हिमांशु चंद्राकर को सालाना 3 से 4 लाख की बचत
ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चंद्राकर ने भी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर मछली पालन को अपनाया।
उन्होंने करीब 28 लाख रुपए की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। योजना के तहत उन्हें 60 प्रतिशत अनुदान मिला। सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें हर साल करीब 3 से 4 लाख रुपए की शुद्ध बचत हो रही है।
गांव में ही मिल रहा मजदूरों को रोजगार
मछली पालन का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। इससे स्थानीय मजदूरों को भी गांव में ही काम मिलने लगा है।
बिरकोनी के मजदूरों का कहना है कि पहले रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब मछली पालन की यूनिटों में सालभर काम मिल रहा है। इससे उन्हें करीब 9 हजार रुपए प्रतिमाह तक की आमदनी हो रही है और परिवार चलाने में मदद मिल रही है।
इन कामों के लिए मिल रही सरकारी मदद
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किसानों और मछली पालकों को कई तरह की गतिविधियों के लिए सहायता दी जा रही है। इनमें—
– नए तालाबों का निर्माण
– बायोफ्लॉक यूनिट
– मछली बीज हैचरी
– पाउंड लाइनर
– कोल्ड स्टोरेज
– मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत तक, जबकि सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
महासमुंद में खेती के साथ मछली पालन को अपनाने से किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ गांवों में रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। अब मछली पालन कई किसानों के लिए सिर्फ एक अतिरिक्त काम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बेहतर आमदनी का मजबूत जरिया बनता जा रहा है।



