सुमन लता यादव की बहुत सुंदर कविता,,घर हमे बहुत थकाते है

घर हमें बहुत थकाते हैं

घर मे होते है बहुत सामान

हर सामानों में धूल की परत

घर पर जमी ये सारी गन्दगी

इन्हें पोछने में लगी मेहनत

घर के जाले और मकड़ियां

घर के सामान धूप दिखाना

ये घर के बिखेरे को जमाना

अस्तव्यस्त सी आलमारियां

सलीके से कतार में सजाना

घर के गंदे कपड़ो की सफाई

उनके सलवटों को हटाना

प्रेस कर उनके क्रीज़ बनाना

यही हैं जो हमे खूब थकाते हैं

तब ये घर हमें चैन दिलाते हैं

कमरतोड़ मेहनत करवाते हैं

अपनी पनाह में हमें लाते हैं

हर मौसम से हमें बचाते हैं

दिन रात हमे चलाते हैं फिर,

अपनी छांव हमें दिलाते हैं

छत का अहसास कराते हैं

चैन की नींद हमें सुलाते हैं

घर हमारे ही तो कहलाते हैं

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