रायपुर – छत्तीसगढ़ के बहुजन समाज पार्टी के पूर्व प्रदेश महामंत्री एवं बिलाईगढ़ जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर खटकर ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अधिकारी कर्मचारी का इंक्रीमेंट,भत्ता रोकने के फैसले को तानाशाही रवैया कहते हुए इसकी कड़ी शब्दों में निंदा करते हुए ऐसी बेतुकी फरमान को छ ग में नहीं चलने देंगे कहा।इन्होंने आगे कहा कि अब सुनने में ये भी आ रहा है कि छ ग वित्त विभाग ने कर्मचारियों का वेतन में से 32 फीसदी राशि कटौती करने का प्रस्ताव सीएम भूपेश बघेल को भेजा गया है जो वित्त विभाग के बहुत घटिया किस्म की सोच और विचार को दर्शाता है जो बेहद ही दुखद और निंदनीय बात है।इन्होंने आगे कहा कि इस महामारी के वक्त पर कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डाल कर वे अपनी दिन रात सेवाएं दे रहे हैं और उनके इंक्रीमेंट रोकना,भत्ता रोकना,32 फीसदी वेतन कटौती करने का प्रस्ताव बनाना,जबरदस्ती बिना कर्मचारी के सहमति से हर माह उनके वेतन में से एक दिन का वेतन काटना यह शासन और उनके नौकरशाहों का तानाशाही रवैए को दर्शाता है वहीं इनका यह फरमान कोविड – 19 में लगे चिकित्सा सेवा के अधिकारी कर्मचारी को हतोत्साहित करने वाला कहा।बल्कि इस वक्त कर्मचारियों को अन्य राज्य की भांति खास तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों अथवा डॉक्टरों,स्टॉफ नर्स,फार्मेसिस्ट, लेब टेक्नीशियन,वार्ड ब्वाय,आया सहित सभी अन्य कर्मचारियों को जो कोबिड – 19 में अपना योगदान दें रहें हैं उन्हें विशेष भत्ता देना चाहिए ताकि की इस मुसीबत कि घड़ी में इनका मनोबल बढ़ा रहें ताकि वे प्रोत्साहित होकर जज्बे के साथ काम करे।
खटकर ने आगे कहा कि बड़े बड़े दलों के वे नेता कहां छुप गए हैं जो चुनाव के समय ऊंची राजनीति सुर्खियां बटोरने अपने खुद के करोड़ों अरबों रुपए खर्च करने में बाज नहीं आते वे आज इस महामारी में डॉक्टरों,कर्मचारियों के वेतन, भत्ते,इंक्रीमेंट कटौती करने की बात करते हैं।मेकाहारा रायपुर जैसे राज्य के बडे अस्पताल में कई दर्जन जूनियर डॉक्टर सामूहिक इस्तीफा दे रहे हैं क्यों की यह सरकार की निष्क्रियता, विफलता का नतीजा है इन चिकित्सकों को सरकार पीपीई कीट प्रबंध नहीं करा पा रही है ऊपर से इनके भत्तों,वेतन में कटौती के आदेश जारी किए गए हैं जो सही नहीं है। ऐसे नेताओं और जनप्रतिनिधियों को मैं बोलना चाहता हूं वे वर्तमान समय पर महामारी के मद्देनजर सीधे जनता के खाते में रकम क्यों नहीं डाल रहे हैं चुनाव के समय तो इनका वोट खरीद कर जीत हासिल कर लेते हैं और बाद में उन्हें ही कुचलने का भरसक प्रयास किया जाता है।अब यही सही वक्त है जिनके पास अथाह धन संपत्ति हैं उनकी संपत्तियों की नीलामी कर लोगो को प्रदान किया जाय,केंद्र के प्रवर्तन निदेशालय के अरबों खरबों रुपए सड़ रही है उस राशि का इस्तेमाल किया जाय।और भी बहुत से रास्ते हैं इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए।देश में कुछ भी आपदा आती है तो केंद्र और राज्य सरकार केवल कर्मचारियों की तनख्वाह पर नजर डाली रहती है
इधर मजदूरों के बारे में बताया कि मजदूर अपने पेट के लिए कमाने खाने अन्य राज्य जाते हैं यदि उन्हें स्थानीय तौर पर काम,रोजगार मिल जाता तो वे बाहर क्यों जाते?? केंद्र सरकार पर बरसते हुए खटकर ने कहा कि बिना प्रवासी मजदूरों का अपना घर वापस आए अचानक तालाबंदी कर दी गई अब जब गरीब जनता अपना घर वापस आना चाहते हैं तो उन्हें न बस, न ट्रेन नसीब हो रही है यदि ट्रेन मिल भी जा रही है तो 1 दिन का रास्ता को 8 दिन में तय कराया जा रहा है इन्हें स्टेशनों पर भोजन भी नहीं दिया जा रहा है भोजन नहीं मिलने से रास्ते में ही भूख से मर रहे हैं। मजदूर पानी,भोजन के लिए मोहताज है और सरकारे वाहवाही बटोर ने में लगी हुई है।अपना अपना सभी दावा कर रहे हैं कि हमने ये किया ओ किया ये सिर्फ जुबानी है धरातल पर कुछ भी नहीं है।मजदूर समय पर घर वापस नहीं हो पाने के डर से वे पैदल ही निकल पड़ रहे हैं। कहां है मोदी का 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज जो पिछले दिनों जारी किए थे?? मै पूछना चाहता हूं कि क्या ये राशि देश के बड़े बड़े धन्ना सेठों को राहत देने के लिए जारी जी गई है ?? केंद्र की मोदी सरकार गरीबों की बात करते हैं मन की बात करते हैं,गरीबों की हीत में बात करते हैं तो एक बार फिर से गरीबों के लिए भुखमरी से बचाने 20 लाख करोड़ रुपए पुनः जारी किए जाए और हर माह निम्न और मिडिल क्लास के ब्यक्तियो के खातों में प्रति माह 10 -10 हज़ार रुपए डाला जावें अन्यथा गरीबों की हिमायती बनने की लालसा भी न करें।वहीं श्री खटकर ने केंद्र की बीजेपी सरकार और छ ग की कांग्रेस सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मदजुर और कर्मचारी विरोधी सरकार कहा।इन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी की इंक्रीमेंट,भत्ते,वेतन में कटौती न किया जाए यह अन्याय है।इंक्रीमेंट,भत्ते कर्मचारियों का हक अधिकार होता है और इनका हक अधिकार को न छीना जाए।देश गवाह है और इतिहास कहता है कि इससे बड़ी आपदा में भी न कोई सरकार इंक्रीमेंट काटी हैं न भत्ते काटी। ऐसे तानाशाही फैसले को छ ग सरकार वापस लें।