
नन्हे दिल को मिली नई धड़कन, चिरायु योजना से भाव्यांश को मिला नया जीवन
रायपुर, 19 सितंबर 2026। समय पर हुई स्वास्थ्य जांच किसी बच्चे की जिंदगी बदल सकती है। धमतरी के नन्हे भाव्यांश साहू की कहानी इसका उदाहरण है। जन्मजात हृदयरोग से जूझ रहे भाव्यांश को चिरायु योजना के जरिए समय पर बीमारी का पता चला और उसका निःशुल्क इलाज कराया गया। सफल हृदय सर्जरी के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
आंगनबाड़ी में जांच के दौरान चला बीमारी का पता
मामला फरवरी 2026 का है। शहरी चिरायु टीम धमतरी की टीम जालमपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच करने पहुंची थी। इसी दौरान डॉक्टरों ने भाव्यांश में जन्मजात हृदयरोग के लक्षण देखे।
टीम ने बिना देर किए बच्चे को आगे की जांच और बेहतर इलाज के लिए श्री सत्य साईं अस्पताल, नया रायपुर रेफर किया। इस दौरान टीम ने परिवार को जरूरी जानकारी दी और इलाज की पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया।
2 सितंबर को हुई सफल हार्ट सर्जरी
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने भाव्यांश की विस्तृत जांच की। जांच के बाद उसकी हृदय सर्जरी करने का फैसला लिया गया।
31 अगस्त 2026 को भाव्यांश को अस्पताल में भर्ती कराया गया और 2 सितंबर को विशेषज्ञ कार्डियक सर्जनों की टीम ने उसकी सफल हृदय सर्जरी की।
सर्जरी के बाद डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे की सेहत में तेजी से सुधार हुआ। इसके बाद 9 सितंबर को उसे स्वस्थ हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
चिरायु योजना का मकसद समय पर बीमारी पकड़ना
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित चिरायु योजना का उद्देश्य जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारी, गंभीर रोग और पोषण संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान करना है।
बीमारी का समय रहते पता चलने पर बच्चों को जरूरत के अनुसार आगे के इलाज के लिए भेजा जाता है। भाव्यांश के मामले में भी चिरायु टीम की समय पर जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज से उसे नया जीवन मिला।
आज भाव्यांश स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच लौट चुका है। उसकी मुस्कान इस बात की खुशी है कि समय पर हुई जांच और सही इलाज से एक मासूम को स्वस्थ जिंदगी वापस मिल सकी।



