मनरेगा के डबरी से मिली आत्मनिर्भता की नई राह, सब्जी उत्पादन से बढ़ी आय

 

जांजगीर-चांपा 13 जून 2026। जिले के ग्राम खपरीडीह की अम्बिका कंवर की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन से उनके जीवन में स्थायी बदलाव आया हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत उनके खेत में निर्मित डबरी आज उनके परिवार की आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता का आधार बन चुकी है।

कुछ वर्ष पहले तक अम्बिका कंवर का परिवार वर्षा आधारित खेती पर निर्भर था। खेत में सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं होने के कारण सीमित फसल उत्पादन ही संभव हो पाता था। वर्ष 2024-25 में मनरेगा के अंतर्गत लगभग 2.39 लाख रुपये की लागत से उनके खेत में डबरी का निर्माण कराया गया। इस कार्य से न केवल खेत में जल संरक्षण की व्यवस्था बनी, बल्कि निर्माण अवधि में 836 मानव दिवस का रोजगार भी सृजित हुआ, जिससे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिला। डबरी निर्माण के बाद वर्षा जल का संचयन होने लगा और खेत को नियमित सिंचाई सुविधा प्राप्त हुई। इसका सकारात्मक परिणाम यह हुआ कि अम्बिका कंवर ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया। वर्तमान में उनके खेत में टमाटर, बैंगन, भिंडी, पत्तागोभी, लौकी, मिर्च, बरबट्टी, करेला और खीरा जैसी विभिन्न सब्जियों की खेती की जा रही है। विशेष रूप से लौकी और ढोंड़का की फसल से उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है।

 

अम्बिका कंवर बताती हैं कि डबरी उनके परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब वे वर्षभर खेती कर पा रही हैं और परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भविष्य में वे डबरी में मछली पालन शुरू कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की योजना भी बना रही हैं। ग्राम खपरीडीह की यह डबरी आज आत्मनिर्भरता, सतत कृषि और ग्रामीण समृद्धि की प्रेरणादायी मिसाल बन गई है।

Live Cricket Live Share Market

विडिओ  न्यूज जरूर देखे 

जवाब जरूर दे 

आप अपने सहर के वर्तमान बिधायक के कार्यों से कितना संतुष्ट है ?

View Results

Loading ... Loading ...

Related Articles

Back to top button
Close
Close