महासमुंद में एलपीजी गैस गबन का बड़ा खुलासा
बसना | महासमुंद जिले में जब्त एलपीजी गैस कैप्सूल ट्रकों से कथित रूप से करोड़ों रुपये की गैस गबन मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। थाना सिंघोडा में दर्ज मामले की जांच के दौरान जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि जब्त गैस कैप्सूल को सुपुर्दनामा में देने की प्रक्रिया के दौरान सुनियोजित तरीके से एलपीजी गैस का गबन किया गया।
पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में थाना सिंघोडा क्षेत्र में 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। गर्मी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए जिला प्रशासन ने खाद्य विभाग को जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में ट्रकों को रायपुर स्थित ठाकुर पेट्रो कैमिकल्स को सुपुर्द किया गया।
87 टन गैस के गबन का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि पांच कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस, जिसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपये बताई गई है, का कथित रूप से गबन किया गया। बाद में जांच में कुल राशि करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।
पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले की साजिश जिला खाद्य अधिकारी अजय कुमार यादव ने रची थी। जांच में महासमुंद निवासी पंकज चंद्राकर और रायपुर निवासी मनीष चौधरी की भूमिका भी सामने आई है।
ऐसे तैयार हुई कथित साजिश
पुलिस जांच के मुताबिक 23 मार्च 2026 को पहली बैठक हुई, जिसमें गैस गबन की योजना बनाई गई। इसके बाद 26 मार्च को आरोपियों ने सिंघोडा थाना पहुंचकर कैप्सूल ट्रकों में भरी गैस की मात्रा का आकलन किया। छह कैप्सूल में करीब 105 मीट्रिक टन एलपीजी होने का अनुमान लगाया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इसके बाद रायपुर की कई एजेंसियों से संपर्क किया गया। अंततः ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के साथ कथित रूप से 80 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
पैसों के लेन-देन का भी खुलासा
पुलिस जांच में कथित रूप से पैसों के बंटवारे की जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि तय रकम में से बड़ा हिस्सा जिला खाद्य अधिकारी को दिया गया, जबकि बाकी रकम अन्य आरोपियों के बीच बांटी गई। रकम के लेन-देन में बैंक खातों का उपयोग “सिक्योरिटी” और “गिरवी राशि” के तौर पर किया गया।
फर्जी पंचनामा तैयार करने का आरोप
मामले में खाली गैस कैप्सूल के वजन को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। पुलिस के अनुसार, गैस खाली करने के बाद 6 और 8 अप्रैल को कैप्सूल का वजन कराया गया, लेकिन पंचनामा कथित रूप से कार्यालय में बैठकर तैयार किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि पंचनामा में जिन लोगों को स्वतंत्र गवाह बनाया गया, वही कथित रूप से पूरे षड्यंत्र में शामिल थे। वजन कांटे की पर्चियों और दस्तावेजों के समय में भी विसंगतियां पाई गई हैं।
बचाव की रणनीति बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मामले में जांच तेज होने और कोर्ट से सुपुर्दनामा आदेश आने के बाद आरोपियों ने आरंग क्षेत्र के एक ढाबे में बैठक कर आगे की रणनीति बनाई थी। इस दौरान सभी को अपने-अपने बयान पर कायम रहने के निर्देश दिए गए थे।
गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने फिलहाल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है—
अजय कुमार यादव, जिला खाद्य अधिकारी
पंकज चंद्राकर, निवासी महासमुंद
मनीष चौधरी, निवासी रायपुर
पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है तथा अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।



