
एम्स रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह: 689 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, उपराष्ट्रपति बोले- डॉक्टर बनना बड़ी जिम्मेदारी
रायपुर, 2 सितंबर 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर का तीसरा दीक्षांत समारोह बुधवार को आयोजित हुआ। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन शामिल हुए। उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि डॉक्टर बनना केवल सम्मान की बात नहीं, बल्कि समाज और देश के प्रति बड़ी जिम्मेदारी भी है।
इस दीक्षांत समारोह में चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान के अलग-अलग पाठ्यक्रमों के 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाण-पत्र दिए गए। इनमें 376 छात्राएं और 313 छात्र शामिल रहे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को पुरस्कार और मेडल भी दिए गए।
डॉक्टरों के कंधों पर लोगों की जिंदगी की जिम्मेदारी
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उन्हें डिग्री मिल रही है, लेकिन आने वाले समय में उनके कंधों पर इससे भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। लोगों का स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन डॉक्टरों की सेवा से जुड़ा होता है।
उन्होंने युवा डॉक्टरों से कहा कि उनका ज्ञान लोगों को स्वस्थ बनाए, उनका शोध नई तकनीक और उपचार के रास्ते खोले तथा उनकी सेवा समाज के लिए प्रेरणा बने।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आया बदलाव
उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों में हुए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में लंबे समय तक खराब सड़क, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और वामपंथी उग्रवाद के कारण विकास प्रभावित रहा।
उन्होंने कहा कि अब छत्तीसगढ़ विकास और प्रगति के नए दौर की ओर बढ़ रहा है। जिन इलाकों की पहचान कभी हिंसा से होती थी, वहां अब सड़क, स्कूल, अस्पताल, कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने इस बदलाव का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के नेतृत्व तथा सुरक्षा और विकास से जुड़ी नीतियों को दिया।

एम्स रायपुर की उपलब्धियों की सराहना
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि 2012 में स्थापना के बाद संस्थान ने मध्य भारत में चिकित्सा शिक्षा, इलाज और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है।
उन्होंने एम्स रायपुर में हुए किडनी प्रत्यारोपण, कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर का भी उल्लेख किया। साथ ही हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
महिलाओं की उच्च शिक्षा में बढ़ी भागीदारी
उपराष्ट्रपति ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन करीब 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया।
उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए जरूरी है कि हर राज्य, जिला और गांव तक विकास पहुंचे और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिले।
राज्यपाल बोले- डॉक्टरों में ज्ञान के साथ करुणा भी जरूरी
राज्यपाल रमेन डेका ने नव-स्नातक डॉक्टरों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा का मतलब केवल ज्ञान और तकनीकी कौशल नहीं है। एक अच्छे डॉक्टर के अंदर धैर्य, करुणा और जिम्मेदारी की भावना भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डॉक्टर की असली पहचान केवल उसकी विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि मरीज के साथ उसके व्यवहार, सम्मान और भरोसे से होती है।
राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों से वैज्ञानिक सोच, शोध और नई तकनीक को अपनाने तथा समाज की जरूरतों के अनुसार बेहतर चिकित्सा समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की शपथ
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और ई-संजीवनी जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने युवा डॉक्टरों से चिकित्सा सेवा के साथ करुणा, नैतिकता, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने की अपील की।
समारोह में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने की शपथ भी दिलाई गई।
एम्स रायपुर के निदेशक ने बताई संस्थान की उपलब्धियां
एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीजों को बेहतर इलाज देने के क्षेत्र में उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रहा है।
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा सहित अन्य अधिकारी, चिकित्सक, विद्यार्थी और उनके परिजन मौजूद रहे।



