
ज़िला पंचायत के जांच अधिकारियों की कार्य शैली स्वयं जांच के घेरे में, एक सप्ताह में जांच होने वाला मामला दो माह में भी नहीं हो पाया पूरा, जनपद पंचायत कसडोल के गौड़ खनिज मद 2016-17 की राशि 1365939.00 फर्जीवाड़ा मामले की जांच लटका अधर में,

बलौदाबाजार 24 जनवरी 2022 । विगत दो माह पूर्व ज़िले के कसडोल निवासी समाज सेवक एवं पत्रकार विजय साहू द्वारा तत्कालीन कलेक्टर सुनील जैन के समक्ष उपस्थित होकर लिखित में आवेदन प्रस्तुत कर जनपद पंचायत कसडोल में जनपद पंचायत के कर्मचारियों/अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा किये जा रहे अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का उल्लेख कर निष्पक्ष रूप से जांच कराने एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर उचित कार्रवाही कराए जाने की शिकायत की गई थी। जिसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर द्वारा तत्काल इस मामले की जांच कराने हेतु उक्त पत्र को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बलौदाबाजार को अंतरण किया गया था ।तत्पश्चात मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बलौदाबाजार के द्वारा गंभीरता दिखाते हुए अपने पत्र क्रमांक -/6303/जि.पं./अधी./T L/शिका. शा./2021-22 के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तत्काल जांच दल गठित करते हुए ज़िला पंचायत बलौदाबाजार के लेखाधिकारी चंद्रकांत एवं प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी त्रिभुवन वर्मा के कंधों पर जांच का जिम्मा सौंपा गया। पर जिस प्रकार से उच्चधिकारियों द्वारा शिकायत को गंभीरता से लिया गया एवं जांच के लिए आदेशित किया गया वहीं अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों को उनके ही अधिनस्थ अधिकारियों द्वारा गंभीरता से न लेते हुए अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही जाहिर किया गया। जिससे ज़िले के दोनों जांच अधिकारियों के कार्यशैली पर लोगों द्वारा उंगली उठाते हुए तरह -तरह के प्रश्न उठाये जा रहे है।
जानें क्या था मामला…..
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के अंतर्गत जनपद पंचायत कसडोल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया था।मामले की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए जानकारी से खुलासा हुआ था।उक्त जानकारी स्थानीय पत्रकार पुरुषोत्तम कैवर्त्य द्वारा मांगी गई थी।जिससे जानबूझकर जनपद पंचायत कसडोल के जनसूचना अधिकारी द्वारा अधूरी जानकारी दी गई थी।वह यह है कि आवेदक द्वारा उक्त गौड़ खनिज मद का नस्तिफाइल मांगा गया था। इस पर जनसूचना अधिकारी के लेखापाल टी आर साहू द्वारा जनपद पंचायत द्वारा किए गए प्रस्ताव एवं उपस्थित सदस्यों के हस्ताक्षर युक्त जानकारी को छोड़कर अन्य सभी जानकारी दी गई,जबकि दस्तावेज में प्रस्ताव होने का दिनांक उपस्थित सदस्यों के नाम का हवाला दिया गया था।इस संबंध में आवेदक द्वारा पूछे जाने पर ,कि मेरे आवेदन में प्रस्ताव का हवाला दिया गया है किंतु प्रस्ताव की उक्त कापी मुझे आपके द्वारा प्रदान नहीं की गई है। तो जनसूचना अधिकारी द्वारा पहले तो कहा गया कि प्रस्ताव का कापी दिया गया है ।जब आवेदक द्वारा दिखाया गया तब कहा गया कि आपके द्वारा केवल नस्ती फाइल मांगी गई है इसलिए प्रस्ताव की कापी नही दी गई। जिस पर आवेदक पुरुषोत्तम कैवर्त्य द्वारा कहा गया कि नस्ती फाइल का प्रथम कड़ी प्रस्ताव होता है जो कि आपके द्वारा नही दिया गया। मुझे उसी की आवश्यकता है आप कहे तो मैं प्रस्ताव की कापी के लिए पुनः आवेदन करूँ।इस पर टी आर साहू ने कहा आवेदन की आवश्यकता नहीं है, आपको प्रस्ताव की कापी मिल जाएगा, किन्तु फिर भी एक माह तक गुमराह करते रहे। इस संबंध में उक्त लेखपाल द्वारा जनसूचना अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी गुमराह किया गया।अंत में जनसूचना अधिकारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण भारती द्वारा कहा गया कि आप पुनः आवेदन करें तब आपको चाही गई कापी दे दी जावेगी। इस पर आवेदक द्वारा बार-बार समझाने की कोशिश की गई किन्तु उसके बावजूद जरूरी दस्तावेज को छिपाकर एक माह तक गुमराह करने की कोशिश की गई।इससे आहत होकर आवेदक को दुबारा आवेदन लगाने मजबूर होना पड़ा।इस तरह जनसूचना अधिकारी के लेखापाल द्वारा जानबूझकर आवेदक को घुमाने का भरपूर प्रयास किया गया।जो कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 का खुला उल्लंघन है।जनपद पंचायत कसडोल द्वारा जब एक जागरूक पत्रकार के साथ इस तरह मनमानी किया जाता है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि अन्य लोगों के साथ किस तरह का रवैया अपनाया जाता होगा। इसके लिए जनसूचना अधिकारी के उक्त लेखापाल पर अधूरी जानकारी देने के लिए कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।तभी ऐसे लोगों को सबक मिलेगी।
मामला है गौड़ खनिज मद 2016-17 की राशि रुपये 1365939.00 का
शासन से वित्तीय वर्ष 2016-17 में उत्खनन क्षेत्र ग्राम पंचायत खपरीडीह के लिए 1315896.00 एवं ग्राम पंचायत कुम्हारी के लिए 50043.00 कुल 1365939.00 स्वीकृत हुआ था, किन्तु जनपद पंचायत की लापरवाही के चलते दो वर्ष तक संबंधित ग्राम पंचायत को राशि आबंटित नही किया गया।दो साल तक राशि यूँ ही पड़ा रहा और अचानक 20/10/2020 को अनुमोदन हेतु जनपद पंचायत कसडोल द्वारा जिला पंचायत बलौदाबाजार को भेजा गया। तब तक त्रिस्तरीय पंचायत का आगामी चुनाव हो चुका था।वह भी बिना प्रस्ताव के जनपद पंचायत कसडोल द्वारा फर्जी तरीके से संशोधित प्रस्ताव क्रमांक 2 दिनांक 16/10/2019 का (पूर्व सदस्यों के कार्यकाल का) हवाला देकर नए कार्यकाल में दिनांक 20/10/2020 को अनुमोदन हेतु जिला पंचायत भेजा गया और जिला पंचायत द्वारा बिना जांच पड़ताल के जबकि प्रस्ताव दिनांक और अनुमोदन हेतु भेजे गए दिनांक से स्पष्ट है कि प्रस्ताव के 01वर्ष 04 दिन बाद अनुमोदन हेतु जिला पंचायत भेजा गया था।जोकि नियमानुसार स्वत:निरस्त है।जिस पर जिला पंचायत द्वारा भी बिना निरीक्षण के आंख मूंदकर अनुमोदन कर दिया गया।जो कि गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता। जबकि उपरोक्त दिखाए गए प्रस्ताव भी फर्जी है ।उक्त तिथि में कोई बैठक हुई ही नही है तो प्रस्ताव कहाँ से होगा ?
इस पूरे मामले को लेकर नगर पंचायत कसडोल के सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार विजय साहू द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बलौदाबाजार-भाटापारा को गौंण खनिज की राशि का बंदरबाट किये जाने एवं विगत 25-26 वर्षों से जनपद पंचायत कसडोल में लेखाधिकारी के पद पर पदस्थ टी आर साहू द्वारा नियम विरुध्द तरीके से पदोन्नति करा कर अधिक वेतन लेकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किये जाने पर की निष्पक्षता पूर्वक जांच कराने एवं दोषी व्यक्तियों पर कठोर कार्यवाही कराने हेतु आवेदन किया गया था ,जिस पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा त्वरित कार्रवाही करते हुए जिला पंचायत लेखाधिकारी चंद्रकांत एवं प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी त्रिभुवन वर्मा को संयुक्त रूप से जांच अधिकारी नियुक्त किया गया किंतु जो जांच प्रतिवेदन जांच अधिकारियों द्वारा सप्ताह भर के भीतर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को सौंपे जानी थी वह आज तक लंबित है।




