●महापौर की पहल पर शहर के दो मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह का होगा निर्माण ● एसईसीएल ने सीएसआर मद से 149.71 लाख रुपए की दी स्वीकृति ●भारती नगर और सरंकड़ा मुक्तिधाम में स्थापित होगी सिस्टम
बिलासपुर 10 अप्रेल 2021। शहर में विद्युत शवदाह गृह की स्थापना हो इसके लिए महापौर राशरण यादव ने पहल करते हुए एसईसीएल प्रबंध निदेशक को पत्र लिख कर विद्युत शवदाह गृह के स्थापना के लिए सीएसआर मद से राशि की मांग की थी जिसके बाद एसईसीएल सीएसआर मद से स्वीकृति 149.71 लाख रुपए किया गया है। जिससे भारतीनगर और सरकंड़ा मुक्तिधाम में विद्युत शवदाह गृह का स्थापना किया जाएगा।
शहर में विद्युत शवदाह गृह की लगातार मांग की जा रही थी । इस संबंध में महापौर रामशरण यादव के अनुरोध पर एसईसीएल प्रबंधन ने उक्त कार्य के लिए सीएसआर मद से स्वीकृति प्रदान कर दी है। एसईसीएल इसके लिए जिला प्रशासन को 149.71 लाख रूपये की सहायता राशि प्रदान करेगा । ये दो विद्युत शवदाह गृह बिलासपुर शहर के सरकण्डा एवं भारतीय नगर अवस्थित पारंपरिक मुक्तिधाम में स्थापित किए जायेंगे । एसईसीएल द्बारा दी गयी स्वीकृति में इलेक्ट्रिक क्रिमेटोरियम सिस्टम के साथ प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम , अवशेष निष्कासन सिस्टम , विद्युतयंत्रों जैसे ट्रान्सफार्मर , पोल आदि की व्यवस्था तथा इससे जुड़े सिविल कार्य एवं पांच वर्षों के लिए संचालन एवं अनुरक्षण का कार्य शामिल है । विदित हो कि हालिया समय में पर्यावरण हितैषी तकनीक के रूप में विद्युत शवदाहगृहों का चलन बढ़ा है तथा कोविड संक्रमगण के काल में इसका प्रयोजन सहूलियत प्रदान करता है ।
*सुरक्षित दाह संस्कार होगा: मेयर*
शहर के दो मुक्तिधाम सरकंडा और भारतीय नगर में विद्युत शवदाह गृह की योजना बनाई है। यहां विद्युत शवदाह गृह बन जाने से दाह संस्कार क्रिया में समस्या नहीं आएगी। एसईसीएल ने सीएसआर मद से 149.71 लाख रूपये की सहायता राशि प्रदान की है। मेयर रामशरण यादव ने बताया कि अभी कोरोना संक्रमण से जान गंवाने वाले लोगों का सुरक्षित दाह संस्कार किया जा रहा है। लेकिन अब मुक्तिधाम में शव जलाने के लिए जगह की कमी हो रही है। ऐसे में विद्युत शवदाह गृह बनने से समस्या का निवारण होगा। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से अस्थियां तक परिजनों को नहीं सौंपा जा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए दोनो मुक्तिधामों में अस्थि लॉकर की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें कोरोना प्रभावित मृतकों की अस्थियां रखी जाएंगी, जिसे बाद में उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। वहीं विद्युत शवदाह गृह के निर्माण से लकड़ी की भी आवश्यकता नहीं होगी और पेड़ो की कटाई में अंशिक विराम आएगा। जिससे पर्यावरण भी बेहत रहेगा।