संपादकीय – भुपेश सरकार के 2 साल होने को जा रहे है लेकिन अब तक सरकार ने अपने सभी निगम, मंडल, बोर्ड व प्राधिकरण का गठन नही कर सकी है। सरकार में अब तक भय व्याप्त है कि कंही जिन कार्यकर्ता को इसमे जगह नही मिली वो सरकार के खिलाफ बगावत न पैदा कर दे। इसलिए तो सरकार बार बार इनके नामो में आपस में मंथन करने के बावजूद भी अभी तक कोई निष्कर्ष तक नही पहुँच सकी है और नामो की सूची आज तक लटकी हुई है।
लेकिन समझने वाली बात है कि निगम, मंडल, बोर्ड या प्राधिकरण के पद क्या सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओ को संतुष्ठ के लिए ही सिर्फ बनाया गया है । क्या इस विभाग की कोई सामाजिक उत्तरदायित्व कुछ नही है ? इनका जनता के हितों से क्या कोई सरोकार नही है ? अगर है तो इसकी नियुक्ति में इतनी देरी क्यों,सरकार के गठन के तुरंत बाद इसकी नियुक्ति क्यों नही की गई । सरकार के गठन के 2 साल होने के बाद भी अब तक इसका गठन न किया जाना व सरकार द्वारा इसके जल्द गठन में कोई रुचि न दिखाना। ये सन्देश देने के लिए काफी है कि इस पद का गठन सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं की संतुष्टि के लिए किया जाना है अब इस पद का कोई सामाजिक उत्तरदायित्व नही रहा।