आज के अतिथि संपादक तरुण खटकर की कलम से पढ़िए उनके लेख, “”ये लापरवाही कही ले न डुबे हम सब को – तरुण खटकर””

 

बलौदाबाजार 10 फरवरी 2022 । जब आप अपने और समाज के जीवन रुपी नाव में लापरवाही रुपी पानी भरते जा रहें तो फिर आपकी जीवन रुपी कश्ती को डुबने से बचाने के लिए कोई भी पतवार काम नही आने वाली ।।

 

एक चीज दिमाग खोलकर स्पष्ट तौर पर समझ लेना आवश्यक है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है और भविष्य में कब खत्म होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है इसका मतलब यही है कि कोरोना का संकट अब अपने रौद्र रुप में है अपनी अदृश्यता के साथ ही तांडव कर रहा है।

 

और प्रमुख कारण है हम सब की लापरवाही लोगों में पता नहीं कौन सी सनक सवार है कि उन्हें कोरोना से संक्रमण के बचाव के उपायों को नजरंदाज करने में कितना आनंद आ रहा है चाहे आम नागरिक हो, व्यवसायी हो, सरकारी अमला हो, विभिन्न संस्था हो,या राजनीतिक क्षेत्र के लोग,न तो स्वास्थ संबंधित दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं न ही सोशल डिस्टेसिग का।अगर बात करना हुआ तो झट से मास्क निकालकर बात करने लग जाते हैं गुटखा,पान, तम्बाकू के लिए बेताबी और खाकर किसी दुसरे की जगह में झट से थुकना मजाल है लोगों को जरा सा शर्म आ जाए ।

 

राजनीतिक पटल जिस पर समाज को सबसे ज्यादा जागरूकता लाने की जिम्मेदारी होती है वही सबसे ज्यादा बेशर्म हो गया है जहां देखो वहीं नेता भीड़ जुटाकर अपने स्वार्थ साधने के लिए लोगों को मौत के मुंह में झोंकने के लिए तैयार हो। कही पर चुनावी तैयारी तो कही पर आकाओं को खुश करने के लिए प्रदर्शन में बाज नही आ रहे हैं ।

 

मानो कोरोना का संकट खत्म हो गया हो दिन रात चौबीस घंटे सरकार और जागरूक लोग , विभाग, विशेषज्ञ, टीवी चैनल, समाचार पत्र,चीख चीखकर बतला रहे हैं कि कोरोना से बचाव के लिए पर्याप्त दूरी बनाइए एहतियात बरतिए और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करिए यहां तक कि मोबाईल फोन काल करने पर एडवाइजरी हर क्षण सुनते हैं लेकिन लोग हैं मानने को तैयार ही नहीं है।

 

इन सब में ज्यादातर खुद को शिक्षित समझने वाला तबका ही अव्व्ल दर्जा हासिल कर रहा है।
घर की महिलाएं और बच्चे भी इस भयानक संकट को हल्के में ले रहे हैं मानो जिन्दगी में सपनों को पुरा करने का क्षण बिता जा रहा है समानों को बचाकर कर चलाने के बजाए बेतहाशा खर्च कर रहे हैं और समानों के लिए बाहर निकल रहें हैं मानों खुशीयों का त्योहार मनाया जा रहा हो लोगों के ऐसे रवैय्ये से लग रहा है जैसे इन्होने अमृत पान किया हो जैसे इन्हें कोरोना बख़्श देगा।

 

खुद पर संकट नहीं आया

 

जब तक ठीक पर समय रहते लोगों के संकट से सबक नहीं लिया तो वो दिन दूर नहीं जब आप संकटों के बीच में होंगे
इसलिए अभी समय है कि स्थितियों को जनता, सरकार, प्रशासन, विभिन्न उपक्रमों के संचालन कर्ता अपने अपने स्तर पर संभाले और कोरोना की भयावहता की गंभीरता को समझते हुए रोकथाम,बचाव, नियंत्रण से संबंधित सरकार और स्वास्थ्य विभाग की सभी दिशा-निर्देशों का समुचित ढंग से अनुशासन पूर्वक अपने अपने दायित्वों का पालन करें।

 

 

जो व्यक्ति जितना ज्यादा संक्रमण से बचाव के लिए उपायों का पालन करेगा वह उतना ही ज्यादा सुरक्षित होगा परंतु कुछ चितपरिचित और नजदीकी लोगों की लापरवाही ऐसे लोगों को संकट में डालने का काम कर रही हैं जब रिश्ते नातों लोगों की चेतना शून्य हो गई हो तो तब भगवान ही मालिक है ।

 

प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना होगा कि सभी का जीवन बहुमूल्य है हर व्यक्ति की उतनी भुमिका है जितनी सरकार की है एवं प्रशासन की है यह जान लिजिए कि एक व्यक्ति की लापरवाही हजारों लोगों के जीवन पर संकट ला सकती हैं इसलिए नियमों का पालन करना प्रारंभ कर दे, सोशल डिस्टेसिग में रहे लोगों घर घुमना फिरना बन्द कर दे आवारागर्दी बंद कर दे नही तो ये लापरवाही ले डुबेगी।

 

आपके इतना सहयोग करने से सरकार और विशेषज्ञों को इस संकट और वाइरस से निपटने के उपायों के लिए समय मिलेगा

जिस तरह ब्लेक डेथ,फ्लेग, स्पैनिश फ्लु,HIV ऐड्स,हैजा डायरीया, मलेरिया,जैसी महामारी बिमारियों से मिला वैसे ही कोरोना से भी मिलेगा

क्योंकि कोरोना से सभी के सहयोग से जीता जा सकता है ।।

मेरी संवेदना

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