
हरित खाद और जैव उर्वरकों से खेती को मिलेगा नया बल: कृषि उत्पादन आयुक्त
रायपुर, 04 अप्रैल 2026। कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने कहा है कि हरित खाद, नीली-हरी शैवाल और जैव उर्वरक भविष्य की टिकाऊ खेती के मजबूत आधार बन सकते हैं। उन्होंने इन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्यभर के 150 से अधिक कृषि अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य खरीफ सीजन से पहले किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्पों के प्रति जागरूक करना था।
अधिकारियों ने बताया कि ये वैकल्पिक उर्वरक फसलों की पोषक आवश्यकताओं का लगभग 50% तक पूरा कर सकते हैं। खासतौर पर नीली-हरी शैवाल धान की खेती में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में बेहद उपयोगी है, जबकि हरित खाद से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है।
वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच राज्य सरकार ने टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल की है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन को भविष्य की खेती के लिए आवश्यक बताया।
प्रशिक्षण के दौरान नीली-हरी शैवाल उत्पादन की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया और किसानों तक इसके व्यापक उपयोग की रणनीति तैयार की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से न केवल किसानों की लागत घटेगी, बल्कि मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होगा और कृषि अधिक आत्मनिर्भर बनेगी।



