नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर फोकस: मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

 

रायपुर, 27 मार्च 2026। विकास शील की अध्यक्षता में नक्सल प्रभावित जिलों में आजीविका संवर्धन और समावेशी विकास को लेकर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य नक्सलवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों में तेज, स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित करना रहा।

 

बैठक में ऋचा शर्मा, निहारिका बारीक, सहला निगार, सोनमणि वोरा, भीम सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ एवं विभागीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे। साथ ही Transform Rural India Foundation के मैनेजिंग डायरेक्टर अनीश कुमार ने समन्वित नीति पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

 

मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि जैसे-जैसे राज्य नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है, वैसे-वैसे विकास की जिम्मेदारी और बढ़ती जा रही है। उन्होंने सभी विभागों को विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

 

कार्यशाला में क्लस्टर आधारित एवं ब्लॉक केंद्रित आजीविका मॉडल पर विशेष चर्चा हुई। इस मॉडल के तहत कृषि, पशुपालन, वनोपज, मत्स्य पालन, हस्तशिल्प एवं सूक्ष्म उद्यमों को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की रणनीति बनाई गई। साथ ही विभिन्न विभागों की योजनाओं के बेहतर समन्वय (कन्वर्जेंस) पर जोर दिया गया।

 

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विकासखंड में संभावित आजीविका क्लस्टरों की पहचान कर 60 दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। इसमें सर्वेक्षण, योजना निर्माण और क्रियान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा शामिल होगी।

 

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि वर्तमान में NCAER के सर्वे के अनुसार इन क्षेत्रों के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर अगले ढाई से तीन वर्षों में न्यूनतम 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने का लक्ष्य रखा है।

 

प्रमुख सचिव निहारिका बारीक ने बताया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विविधीकरण, सामूहिकीकरण, प्रौद्योगिकी और संतृप्ति के चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रणनीति अपनाई जाएगी। प्रत्येक परिवार को कम से कम तीन आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की योजना है, जबकि हर जिले में चार प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।

इसके अलावा उत्पादन से लेकर विपणन तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) को बढ़ावा देने और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर भी जोर दिया गया। इस दिशा में NABARD, FES एवं प्रदान जैसे संगठनों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 

कार्यशाला में “ट्राइपॉड मॉडल” को भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें परिवार, क्षेत्र और गतिविधियों को जोड़कर समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

 

यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक होगी।

 

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