चिल्हाटी में खसरा नंबर 224 के जमीन खरीददार नामांतरण के लिए पिछले ढाई साल से भटक रहे हैं।

 

बिलासपुर 17 जनवरी 2022 । चिल्हाटी के जमीन खरीददार इस समय नामांतरण नही होने खासे परेशान हैं इसका प्रमुख कारण खसरा नंबर 224 में कुछ लोगों की जमीन अवैध और विवादित है।जानकार सूत्रों के मुताबिक उक्त खसरा नंबर में कुछ के विवादित व अवैध भूमि के कारण दर्जनों सही लोगों को नामांतरण के लिए पिछले ढाई साल से राजस्व विभाग का चक्कर काटना पड़ रहा है।उक्त खसरा नंबर में करीब 400 एकड़ से ज्यादा भूमि शामिल है। ज्यादातर अवैध प्लॉट की शिकायत चिल्हाटी और लगरा सीमा के पास बताया जा रहा है।राजस्व विभाग के अनुसार इस खसरा में 50 नामांतरण के मामले लंबित है।वहीं खसरा नंबर 224/422 की बात करें तो यह जमीन जो की चिल्हाटी में चिल्ड्रन वेली स्कूल के पीछे स्थित है।यहां पर भूमि लेने वालों के मामले में अधिकांश के नामांतरण प्रकरण 2020 में ही निपटा दिया गया है केवल 5 लोगों का नामांतरण करना शेष है और इन पीड़ितों ने शासन प्रशासन से तत्काल नामांतरण करने की मांग की है।
नामांतरण के लिए ढाई साल से भटक रहे लोगों का कहना है कि जिनके जमीन में विवाद है और अवैध है उनका प्रकरण रोके रखना चाहिए लेकिन जिनकी भूमि सही है विवाद नहीं है उनका नामांतरण किया जाना चाहिए। नामांतरण नहीं होने से वे उस जमीन में मकान नहीं बना पा रहे हैं।इस मामले पर हमारे संवाददाता ने राजस्व रिकार्ड की पड़ताल की तो यह जमीन 20 – 25 साल पहले किसी सद्दाम हुसैन के नाम पर दर्ज है जिसमें वे खेती करते थे। चिल्हाटी बिलासपुर शहर से लगे होने के कारण बसाहट की मांग बढ़ती गई जिसके कारण लोग खेती जमीन खरीदते गए।तहसील कार्यालय बिलासपुर में खसरा नंबर 224/422 का जो नामांतरण के लिए फाइल प्रस्तुत किया गया यह अविवादित भूमि का है जो डायवर्सन भी है।इस संदर्भ में राजस्व निरीक्षक निखिल झा ने बताया की मैं अवकाश पर था इस मामले को तहसीलदार साहब स्वयं देख रहे हैं। वहीं इस मामले में तहसील कार्यालय बिलासपुर के तहसीलदार रमेश कुमार मोरे ने जांच का हवाले देते हुए कहा की अभी जांच चल रही है जांच उपरांत आगे की कार्यवाही की जाएगी। लोगों के भूमि नामांतरण में हो रही देरी के कारण कईयों का मकान बनाने का सपना अधूरा हो गया है वे तहसील कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं लोग दूसरों की गलती की सजा भुगत रहे हैं।ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए प्रशासन को एक व्यवस्था बनानी चाहिए की जो विवादित व अवैध भूमि है उसकी रजिस्ट्री ही नहीं होनी चाहिए ताकि भोले भाले लोगों को नामांतरण के लिए सालों इंतजार न करना पड़े।आपको बता दें कि शासन प्रशासन राजस्व मामले का निपटारा जल्द से जल्द करने बार बार निर्देश दे रहा है इसके बावजूद हजारों राजस्व मामले पेंडिंग है। राजस्व प्रकरणों की बढ़ती संख्या और उसी रफ्तार से लंबित मामलों की फाइलों के लग रहे अंबार के बीच किसान,भूमि स्वामी और अन्य लोग परेशान हैं। इससे दोनों पक्षों की परेशानी बढ़ने लगी है।

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