पामगढ़ में खाद की कालाबाजारी चरम पर, जिम्मेदार मौन

 

पामगढ़। खरीफ सीजन में जहां समय पर खाद मिलना किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरत है, वहीं पामगढ़ क्षेत्र में यूरिया की भारी किल्लत ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान समर्थन मूल्य पर खाद न मिलने से परेशान हैं और दुकानदारों से महंगे दामों पर यूरिया खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।

 

किसानों का आरोप है कि यूरिया का कोई तय रेट बाजार में नहीं है। कोई 850 रुपये तो कोई 1000 रुपये प्रति बोरी तक बेच रहा है। मजबूरी में किसान यही महंगा यूरिया खरीद रहे हैं। इतना ही नहीं, दुकानदार किसानों को यह तक कह रहे हैं कि अगर कोई पूछे तो बताना कि खाद 266 रुपये में लिया है।

 

किसानों की व्यथा

 

तुकाराम खांडे, किसान पामगढ़

“यूरिया नहीं मिलने की वजह से हमें मजबूरन महंगे दामों पर दुकान से लेना पड़ रहा है। दुकानदारों को इसका सीधा फायदा हो रहा है।”

 

जनप्रतिनिधियों का आरोप

 

प्रीति अजय दिव्य, जिला पंचायत सदस्य जांजगीर-चांपा

“सरकार के संरक्षण में ही दुकानदार कालाबाजारी कर रहे हैं। अगर पर्याप्त मात्रा में समर्थन मूल्य पर खाद उपलब्ध कराया जाता तो यह स्थिति नहीं बनती।”

 

प्रशासन का पक्ष

 

महेंद्र कुमार लहरे, तहसीलदार पामगढ़

“अब तक मेरे संज्ञान में कोई शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलते ही निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।”

 

राजनीतिक प्रतिक्रिया

 

संतोष लहरे, जिला अध्यक्ष अजा मोर्चा एवं छाया विधायक पामगढ़

“डबल इंजन की सरकार ने सितंबर माह में 60,800 मीट्रिक टन यूरिया का आवंटन स्वीकृत किया है। आपके द्वारा मिली जानकारी पर मैंने तत्काल एसडीएम पामगढ़ को निर्देशित किया है कि टीम गठित कर महंगे दामों पर खाद बेचने वालों पर कार्रवाई करें।”

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