बिलासपुर 04 जुलाई 2020। वन अधिकार अधिनियम के तहत वन, राजस्व एवं अन्य मैदानी अमले के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआर) और सामुदायिक अधिकार (सीआर) की मान्यता के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया को प्रतिभागियों ने बारीकी से समझा।
मंथन सभाकक्ष में आयोजित प्रशिक्षण में अतिरिक्त कलेक्टर श्री बी.एस. उईके ने प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं परंपरागत वन निवासी को उनके अधिकार, स्वावलंबन एवं सम्मान दिलाने के लिए यह अधिनियम बनाया गया है। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि वन अधिकार अधिनियम का लाभ वनवासियों को समुचित रूप से मिल सकें। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत सभी प्रकरणों का निराकरण नियमानुसार किया जाए। सभी विभाग आपस में सामंजस्य बनाकर प्रकरणों का निपटारा करें। कोटा अनुविभाग के एस.डी.एम श्री आनंदरूप तिवारी ने वन अधिकार अधिनियम के संबंध में विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वन अधिकार समिति के गठन के पूर्व ग्राम सभा का आयोजन किया जाएगा। मजरे टोले के लिए अलग से ग्राम सभा आयोजित की जाएगी। ग्राम सभा के उपरान्त ग्राम स्तर पर वन अधिकार समिति का गठन किया जाएगा। समिति में 10 से 15 सदस्य होंगे। इस समिति में गांव के निवासियों का प्रतिनिधित्व होगा। उन्होंने कहा कि अधिनियम का उददेश्य वन अधिकारों की मान्यता है।
बैठक में मस्तूरी एस.डी.एम श्रीमती मोनिका वर्मा, सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, वन विभाग के अधिकारी एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।