Global36garh news : वॉट्सएप ग्रुप में असंवैधानिक शब्द के प्रयोग से नाराज सतनामी समाज के लोगों ने सरसीवां थाने में की शिकायत,7 दिवस के अंदर संबंधित पर कार्यवाही नहीं होने पर दी आंदोलन की चेतावनी।

 

सारंगढ़/बिलाईगढ़ 18 सितंबर 2022 । वॉट्सएप ग्रुप कैबिनट+MLA ग्रुप बिलाईगढ़ में ग्रुप के प्रेम पाठक नाम के एक सदस्य ने असंवैधानिक शब्द का प्रयोग कर दिया।ग्रुप में इस शब्द के पोस्ट होते ही सतनामी समाज के सामाजिक लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगे और थाना सरसीवां में इसकी शिकायत की गई।ग्रुप की यह पोस्ट के स्क्रीन शॉट कई वाट्सअप ग्रुप में वायरल होते गए और सभी ने इसकी निंदा करते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की।गौरतलब है कि हरिजन शब्द को संसद में भी 1985 में बोलने,लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया है वहीं सुप्रीम कोर्ट ने11 अक्टूबर 2020 को हरिजन लिखने बोलने को आपराधिक माना है।शब्द का इस्तेमाल करने पर उसके खिलाफ एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) (आर) (एस) (यू) व आईपीसी की धारा 295 A व 505 के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है तथा इसमें जेल भी जाना पड़ सकता है तथा अपराध साबित होने पर आरोपी को कम से कम 5 साल तक की सजा भी हो सकती है।

 

उक्त शब्द के प्रयोग पर संशोधित अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार अधिनियम व भारतीय दंड संहिता की धाराओं में केस दर्ज हो सकता है, व जाना पड़ सकता है जेल।इस शब्द का प्रयोग करने वाले लोगों व सरकारी काम काज में इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज हो सकता है। महात्मा गांधी द्वारा भारत के अनुसूचित जाति व जनजाति समुदाय के लोगों के लिए उपयोग किए गए शब्द हरिजन का प्रयोग करना अब महंगा पड़ सकता है। भारत की राष्ट्रपति ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के पत्र दिनांक 22-11-12 व क्रमांक 17020/64/2010 / SCD (RL CELL) के मार्फत सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सर्कुलर जारी कर हरिजन शब्द के सरकारी काम काज में इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाने के आदेश दिए हुए हैं। इसी हरिजन शब्द का इस्तेमाल उच्च जाति के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति के लोगों को नीचा दिखाने व अपमानित करने के लिए किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने दायर कुछ फैसले में कहा कि हरिजन शब्द का प्रयोग अपमान जनक के साथ-साथ आपराधिक भी है, इसलिए इस तरह के मामलों में अपराधी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हरिजन शब्द का इस्तेमाल जानबूझकर एक जाति विशेष को नीचा दिखाने व अपमानित करने के लिए किया जा रहा है । सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश का नागरिक होने के नाते हमें एक बात अपने दिल और दिमाग में रखनी चाहिए कि हम देश के किसी भी नागरिक को इस तरह की भाषा का प्रयोग कर नीचा दिखाना या अपमानित नहीं कर सकते अगर ऐसा करते हैं तो यह आपराधिक होगा।इन दिनों पुलिस व सरकारी अधिकारियों द्वारा सरकारी कामकाज में भारत सरकार के उपरोक्त निर्देश व सुप्रीम कोर्ट की उपरोक्त जजमेंट के बावजूद हरिजन शब्द का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है तथा सरकारी अधिकारी तथा लोग जानबूझकर सरकारी आदेशों व कोर्ट के आदेशों की आपराधिक अवहेलना कर रहे हैं । इस शब्द का इस्तेमाल करने पर उसके खिलाफ एससी एसटी एक्ट की धारा 3(1) (आर) (एस) (यू) व आईपीसी की धारा 295 A व 505 के तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है तथा केंद्र सरकार ने 1990 में कल्याण मंत्रालय (अब सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय) की एक अधिसूचना को फिर से जारी किया है, जिसमें दलित वर्गों को अनुसूचित जाति के रूप में संबोधित करने का निर्देश है।

 

 

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