पिछड़े, दलितों, शोषितों व अल्पसंख्यकों के हितों की लड़ाई लड़ने वाला सामाजिक क्रांति के योद्धा एडवोकेट रामकृष्ण जांगड़े का कोरोना से निधन,निधन की खबर से समूचे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई।।

Global36 गढ़ के संवाददाता नीलकांत खटकर।

रायपुर 26मार्च 2021। छत्तीसगढ़ प्रदेश में बहुजन आंदोलन के प्रतीक और मूल निवासियों की अस्मिता की आवाज माने जाने वाले, पिछड़े, दलित, शोषित व अल्पसंख्यकों के हितों की लड़ाई लड़ने वाला सामाजिक क्रांति का योद्धा “एडवोकेट रामकृष्ण जांगड़े” जी हमारे बीच नहीं रहे वो 56 साल के थे ।कोविड 19 से संक्रमित हो जाने के कारण पहले उन्हें रायपुर के मेकाहारा में व बाद में एम्स में इलाज के लिए भर्ती कराया गया जहां वो ज़िन्दगी की जंग हार गए उन्होंने दिनांक 25 मार्च 2021 की दोपहर लगभग 1 बजे अंतिम सांस ली । इस दुखद खबर से प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई और समूचा बहुजन समाज स्तब्ध है । उनका जन्म 1 अप्रैल 1965 को छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजर जिले के बिलाईगढ़ विकासखंड के ग्राम कोसमकुंडा में एक अति सामान्य परिवार में हुआ वे सतनामी समाज के दलित वर्ग से आते थे। इनकी स्कूली शिक्षा बिलाईगढ़ में ही हुई । श्री जांगड़े जब हाई स्कूल में थे तभी “मान्यवर कांशीराम” छत्तीसगढ़ आए और छत्तीसगढ़ में बहुजन आंदोलन चला रहे थे तब मान्यवर कांसीराम जी की नजर छात्र रामकृष्ण जांगड़े पर पड़ी , उनकी पारखी नजर ने किशोर रामकृष्ण की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें छत्तीसगढ़ बहुजन छात्र संघ का प्रदेश छात्र संगठन का अध्यक्ष बना दिया । कालांतर में मान्यवर कांसीराम जी ने रामकृष्ण जांगड़े जी को अपने साथ 1984 में भोपाल ले गए और अपने साथ ही अपने बच्चे की तरह रखा । श्री रामकृष्ण जांगड़े ने मान्यवर कांसीराम के सानिध्य में भोपाल में रहते हुए ही स्नातक व एल एल बी की शिक्षा हासिल की । 1996 में वे संयुक्त मध्यप्रदेश की बहुजन समाज पार्टी प्रदेश इकाई के महासचिव बनाए गए। मान्यवर कांशीराम जी की मौत के बाद बदले हालातो में परिस्थितियां उनके विपरीत हुईं , उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी पर उन्होंने बहुजन आंदोलन को नहीं छोड़ा।
उसके बाद उन्होंने “सामाजिक न्याय मंच” छत्तीसगढ़ का गठन किया, जिसके बैनर तले देश में पहली बार छत्तीसगढ़ प्रदेश के बिलासपुर में “संविधान दिवस” मनाने की परम्परा की शुरुआत की गई । उसके बाद 2016 में उन्होंने एससी, एसटी, ओबीसी व अल्पसंख्यक “संयुक्त मोर्चा “छत्तीसगढ़ का गठन किया गया जिसके वो मुख्य संयोजक थे।श्री रामकृष्ण जांगड़े जी के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा छत्तीसगढ़ ने 3। जुलाई 2016 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर मध्य प्रदेश के प्रमोशन में आरक्षण समाप्त करने संबंधी निर्णय के विरुद्ध रायपुर में लगभग 40 हजार कार्यकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा कर रैली निकली गई जो ऐतिहासिक थी। संयुक्त मोर्चा द्वारा छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भाजपा सरकार के जन विरोधी नीतियों के खिलाफ कई रैलियां वा जन सभाएं की , जिसमें मुख्यत 30 अपील 2017 को पूरे केंद्रीय मंत्री श्री शरद यादव के मुख्य आतिथ्य में रायपुर में, दिनांक 8 जुलाई 2017 को देश के ख्यतीनाम वरिष्ठ पत्रकार , लेखक और राज्यसभा टी वी के पूरे संपादक श्री उर्मिलेश जी के मुख्य आतिथ्य में रायपुर में, 26 नवंबर 2017 को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय श्री के जी बालाकृष्णन जी के मुख्य आतिथ्य में संविधान दिवस का भव्य आयोजन किया गया । उसके बाद नागरिक संगठनों , युवाओं और छात्रों के संगठन “हम भारत के लोग “से भी श्री रामकृष्ण जांगड़े जी जुड़े और उनका मार्गदर्शन किया। 2 अप्रैल 2018 का आरक्षण बचाओ आंदोलन भी एडवोकेट रामकृष्ण जांगड़े जी के नेतृत्व में सफल व शांतिपूर्ण प्रदेश ब्यापी बंद था । श्री रामकृष्ण जांगड़े जी छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक धरोहर और पूर्वकालीन दक्षिण कौशल राज्य की राजधानी “सिरपुर” क्षेत्र जो बौद्ध कालीन व पुरातात्विक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है , के गौरव को पुनः वापस लौटाने और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर रेखांकित करने के उद्देश्य से गठित “छत्तीसगढ़ हेरिटेज एंड कल्चरल फाउंडेशन” संस्था से भी जुड़े रहे , उन्हीं की अगुवाई एवं मार्गदर्शन में 19, 20 व 21 फरवरी को 2019 में , 8, 9 व 10 मार्च को 2020 में तथा 12, 13 व 14 मार्च को 2021 में अंतरराष्ट्रीय सिरपुर महोत्सव का आयोजन हुआ था जिसमें विश्व के लगभग 22 देशों के बौद्ध धर्म के संत व देश के कोने कोने के विद्वान व रिसर्च स्कॉलर और प्रदेश के प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया था । इसी आयोजन के दौरान ही एडवोकेट जांगड़े जी कोविड़ 19 से संक्रमित हुए थे । एडवोकेट जांगड़े के निधन से छत्तीसगढ़ प्रदेश में बहुजन आंदोलन का एक अध्याय समाप्त हो गया है । एडवोकेट जांगड़े के असमय चले जाने से मूल निवासी आंदोलन और बहुजन चेतना के क्षेत्र में शून्यता आ गई है जो अपूरणीय क्षति है । सामाजिक आंदोलन के योद्धा को क्रांतिकारी सलाम। उनके विचारों की गूंज हर जनसभा, रैली और प्रदर्शनों में दशकों सुनाई देगी ।रामकृष्ण जांगड़े एक अत्यंत सरल,सहज,मृदुभाषी,मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। छत्तीसगढ़ ने एक महान सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी – चिंतक खो दिया। बहुजन आंदोलन को सफल बनाने में उनका हमेशा योगदान रहा है उनके चले जाने से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने समाज को जगाने का जो बीड़ा उठाया था वह अनुकरणीय था।आज से 2 माह पहले भी उनके भाई गोरे लाल बौद्ध का एक भीषण सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था परिवार सदमे से उबरा नहीं था और अब जांगड़े परिवार के चर्चित चहेते रामकृष्ण जांगड़े का कोरोना से निधन होने पर रायपुर से लेकर अंचल तक के लोग स्तब्ध हैं।इस दुखद घड़ी पर सभी ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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