पिछले साल चिटफंड निवेशकों से जमा किए आवेदनों पर नहीं हो रही कार्यवाही,निवेशकों को समय पर नहीं मिल रहा है उनका पैसा वापस।

 

रायपुर 18 मई 2022 । छ ग सरकार ने चिटफंड कंपनियों में फंसे पैसे को वापस देने के वादे और कड़े निर्देश के बाद भी इस ओर तत्परता नहीं दिख रही है। प्रशासनिक स्तर पर जिस तरह कार्यवाही होनी चाहिए वह नहीं हो पा रही है जिससे लोगों को उनका पैसा समय पर वापस नहीं मिल पा रहा है। पूरे राज्य में अनुविभाग/ब्लॉक स्तर पर पीडितों से आवेदन तो जमा करा दिया है लेकिन अभी तक स्क्रुटनी तक नही किया है।स्क्रुटनी के बाद तहसीलों से प्रतिवेदन भेजा जाएगा जिसके आधार पर आवेदनों को थानों में विवेचना के लिए भेजा जाएगा।स्क्रुटनी में देखा जाएगा की आवेदन में अकाउंट नंबर सही दर्ज किया गया है या नहीं।जितनी राशि की आवेदक ने मांग की है उतनी राशि की रसीद लगी है कि नहीं। दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद ही प्रतिवेदन तैयार होगा।
अभी पूरे प्रदेश में चिटफंड पीड़ितों को पैसे वापस कराने में सबसे अच्छा काम राजनांदगांव जिला के प्रशासन ने किया है वहां लाखों लोगों के खाते में पैसे डाले गए वहीं धमतरी जिला प्रशासन ने भी पिछले साल कई कंपनियों की संपत्ति नीलामी कर पैसा वापस कराए हैं।रायपुर में भी पुलिस प्रशासन के द्वारा दर्जनों चिटफंड कंपनियों की संपत्ति कुर्की नीलामी करा दी गई है जिसका पैसा भी जल्द खातों में डाले जाएंगे।इधर सरकार को चिटफंड अधिनियम में शिथिल करना होगा अन्यथा दर्जनों चिटफंड कंपनियों की संपत्ति कुर्की नीलामी नहीं हो पाएगी अभी वर्तमान अधिनियम के अनुसार 21 जुलाई 2015 के बाद थानों में दर्ज मामलों पर ही संपत्तियों की कुर्की नीलामी हो पाएगी इसके पहले के प्रकरण ठंडे बस्ते में जा सकते हैं।इसके लिए सरकार को चिटफंड अधिनियम 2015 को शिथिल करना होगा या पीड़ितों को ऐसे थानों में मामला दर्ज कराना होगा जहां संबंधित कंपनी के खिलाफ अपराध कायम न हुआ हो।जिला बलौदाबाज़ार के तहसील बिलाईगढ़ की बात करें तो यहां कुल 132 चिटफण्ड कंपनियों के 26830 आवेदन जमा किया गया। आवेदन जमा पिछले साल 2021 के अगस्त में लिए गए थे लेकिन अभी तक आवेदन में से छांटा नही किया गया है की कौन से चिटफंड कंपनी की प्रदेश के किस जगह पर संपत्ति है और कोई सी कंपनी की संपत्ति नहीं है जबकि अब तक छांटने का काम पूर्ण हो जाना चाहिए था।इसके बाद संबंधित कंपनी की संपत्ति की कुर्की नीलामी करने न्यायालयों में जिला प्रशासन द्वारा अनुमति के लिए आवेदन लगाया जाएगा जिसमें 2 से 3 माह लग जाते हैं।
कई कंपनियों की संपत्ति है मामला पंजीबद्ध है फिर भी कार्यवाही नहीं।कोरबा जिला के कोतवाली थाना में 13 सितम्बर 2015 में रुचि रियल स्टेट चिटफण्ड कंपनी के खिलाफ एक पीड़ित ने मामला दर्ज कराया था जिसकी संपत्ति बिरगांव रायपुर में स्थित है।कोरबा चिटफंड सेल यदि तत्परता दिखाता है तो लोगों को उनका पैसा वापस मिल जाएगा। वहीं कोलकाता वेयर एंडस्ट्रीज लिमिटेड नाम की चिटफंड कंपनी की संपत्ति जांजगीर जिले के भैंसो,पामगढ़, में करोड़ों की जमीन है जिसका मामला थाना सरसीवां में दर्ज है लेकिन इस ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है न पुलिस।

 

 

 

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