बिलासपुर 18 फरवरी 2021।छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल जी की सरकार बनी, जोर शोर से प्रचार की गई कि अब छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़िया सरकार बना है, अब छत्तीसगढ़ी,छत्तीसगढ़िया, छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोक कलाओं को मंच मिलेगा, संरक्षण संवर्धन होगा लेकिन….
“सिधवा छत्तीसगढि़यां मनखे अब्बड़ खुश, बासी, चटनी म संतोष करियेया फेर मान गे।”
दो साल में कथनी करनी दिख गई भूपेश सरकार की। उंक्त बातें राज्य पिछड़ा वर्ग के पूर्व अध्यक्ष डॉ सोमनाथ यादव ने कही।
डॉ यादव ने आगे कहा कि सबसे ज्यादा शोषण छत्तीसगढ़ के लोक कला की हो रही है, गरीब कलाकार रास्ता देख रहा है और बिहार, उड़ीसा के बाहरी कलाकार या फिर दलाल,मिक्स टाईप के अधकचरा कलाकार मज़ा मार रहे है।
डॉ यादव ने कहा कि महोत्सव के नाम पर सरकारी आयोजन में (सिर्फ ताम झाम में) करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है, पर बरसों से लोक कलाकारों को मंच देने और अपनी संस्कृति को संरक्षित रखने वाले संस्थाओं के लिए भूपेश सरकार के पास कुछ राशि देने हेतु पैसा नहीं, राज्य सरकार की संस्कृति विभाग में ढर्रा शाही और राजनीति इस कदर हावी है कि बेचारा कलाकार की क्या बिसात अच्छे अच्छों को संस्कृति विभाग के अधिकारियों की बदमिजाजी ने हक्का बक्का कर दिया है।
डॉ यादव ने कहा कि आज ही समाचार पत्रों से पता चला कि आसाम में हो रहे चुनाव हेतु 50_60 कलाकारों को राज्य सरकार ने चुनाव प्रचार में भेजा है,यह भी जानकारी मिली कि ये सभी कलाकार हवाई जहाज से आसाम गए। जिस सरकार के पास गरीब कलाकारों को मंच देने के लिए पैसा नहीं है, लोक महोत्सव को निरंतर देने वाले अनुदान के लिए पैसा नहीं है, वो सरकार कांग्रेस पार्टी के चुनाव प्रचार हेतु करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।