महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का हाल बेहाल।। योजना अंतर्गत कार्यरत लगभग 25 हजार से अधिक कर्मचारियों को 4 माह से अधिक हो गया वेतन भुगतान नहीं।।

Global36 गढ़ के संवाददाता नीलकांत खटकर।

रायपुर / बलौदाबाजार 14 मई2021। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ग्रामीण स्तर पर संचालित योजनाओ में से प्रमुख योजना है, इस योजना से पुरे देश के ग्रामीण जन समुहो को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। यदि इस योजना का क्रियान्वयन सही से किया जाये तो ये वास्तविक रुप से एक महत्वपूर्ण योजना है, परंतु यह योजना सिर्फ कागजो में गारंटी नाम मात्र है।आपको बता दें कि इस योजना के तहत100 दिवस का मजदूरी भुगतान राशि में 75 फ़ीसदी अंश केन्द्र का रहता है और 25% अंश राज्य का रहता है, परंतु केन्द्र सरकार के द्वारा समय पर मजदूरी एवं सामग्री मद की राशि का भुगतान नहीं करने पर पुरा यह योजना निचले स्तर पर विफल होते दिख रहा है।केद्र सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ को अपने मद का लगभग 500 करोड़ से अधिक के राशि का 08 माह से अधिक समय से उपलब्ध नहीं कराया गया है, एक तरफ राज्य मे कोरोना के कहर से पुरे ग्रामीण परिवेश का हाल बेहाल है तो दुसरे तरफ केन्द्र सरकार के इस रवैये से पुरा दुकानदारो एवं सरपंचॊ की हालत ख़राब हो गई है| सभी लोग कर्ज ले कर कार्य तो करा लिया गया है, अब साहूकारो से कर्ज ले कर राशि चुका रहे हैं, सुनने को तो ये भी आ रहा है कि कई कर्जदार सरपंच 03 माह से घर और गांव से नदारद है।
एक तरफ अन्य योजना कि बात किया जाए तो कार्य करने के लिये पूर्व में 40 प्रतिशत राशि उपलब्ध कराया जाता है, साथ ही कार्य पूर्ण होने पर 8-10 दिन में पूरी राशि जारी किया जाता है, परंतु मनरेगा योजना मे कार्य पूर्ण होने के 8 माह बाद भी भुगतान नहीं किया जाना समझ से परे है।वर्ष 2021-22 से केन्द्र सरकार के द्वारा मजदूरी भुगतान मे एक अलग प्रकिया का अनुपालन किया जा रहा है, जिसमे एक साथ कार्य किये श्रमिको में एससी एवं एसटी श्रमिको को पहले राशि का भुगतान किया जा रहा है वहीं अन्य प्रवर्ग के मजदूरो का भुगतान विगत एक माह से अधिक हो गया लम्बित है। जिससे पुरी योजना धरातल पर फिसड्डी साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ की बात किया जाए तो पुरे प्रदेश मे लगभग 25 हजार से अधिक कर्मचारी इस योजना के अंतर्गत कार्यरत है, जिनको वेतन भुगतान इस योजना के प्रशासनीक मद से किया जाता है,विगत 4 माह से किसी भी कर्मचारी को वेतन भुगतान नहीं हुआ है, एक तरफ कोरोना तो दुसरी तरफ भुखमरी। इस योजना के कर्मचारी ही अपनी पीडा समझ सकते हैं, फिर भी ये कर्मचारी ग्रामीण अंचल के कमजोर तबके के श्रमीको को रोजगार उपलब्ध कराने मे पिछे नहीं है|पूरे छत्तीसगढ़ की बात की जाए तो 600 करोड रुपये अटका है। वहीं बिलाईगढ़ ब्लाक में लगभग 03 करोड़ रुपये रुका हुआ है।परेशान जनपद पंचायत बिलाईगढ के पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन प्रशासन से उक्त योजना की राशि तत्काल प्रदान करने की मांग की है।

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